तिरुपत्तूरः तमिलनाडू में जोलारपेट्टई जंक्शन के रेलवे यार्ड में सातों खाली बोगियां खड़ी थीं। इन्हें बिना इंजन के वहां छोड़ा गया था। इसी दौरान बोगियां अचानक लुढ़कने लगीं। रेलवे यार्ड से निकलने के बाद ये करीब 6 किलोमीटर तक आगे बढ़ गईं। आखिरकार थमलेरी मुथुर के पास मुख्य रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर पटरी से उतर गईं। इस वजह से बेंगलुरु और चेन्नई के बीच ट्रेन सेवाएं बाधित हो गई। वहीं घटना से एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
इस घटना के बाद इमरजेंसी में कार्रवाई शुरू हो गई, और रेलवे अधिकारियों ने अधिकारियों को अलर्ट किया कि वे बेंगलुरु से जोलारपेट्टई आ रही ट्रेनों को अलग-अलग जगहों पर रोक दें ताकि टक्कर होने से बचा जा सके। बताया जाता है कि जब ड्यूटी पर मौजूद गेटकीपर ने पटरी से उतरे डिब्बों की अजीब आवाज सुनी और तुरंत रेलवे अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों ने ट्रैक से बोगियों को हटाने का काम शुरू किया। इसके लिए गैस-कटिंग उपकरणों की मदद से बोगियों को आपस में जोड़ने वाले हिस्सों को अलग किया गया। इसके बाद JCB मशीनों को मौके पर बुलाया गया। उनकी मदद से बोगियों को मुख्य रेलवे ट्रैक से हटाया गया।
इस घटना से बेंगलुरु-चेन्नई रूट पर चलने वाली कई ट्रेनें प्रभावित हुईं, जिससे उनकी तय सर्विस में देरी हुई और यात्रियों के आने-जाने में दिक्कत हुई। जोलारपेट्टई रेलवे जंक्शन 16 रेलवे ट्रैक वाला एक महत्वपूर्ण रेलवे हब है और इसे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे यार्ड होने के लिए भी जाना जाता है। इस घटना ने जोलारपेट्टई रेलवे यार्ड में सुरक्षा तरीकों, ऑपरेशनल जिम्मेदारियों और मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर मेंटेनेंस के काम के लिए खड़े कोच की सुरक्षा को लेकर। यात्रियों और आम लोगों ने घटना की विस्तृत में जांच और लापरवाही साबित होने पर सही कार्रवाई की मांग की है।
