चंडीगढ़। हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की धान की फसल की सुचारू, पारदर्शी और समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान प्रदेश की मंडियों में धान की आवक, खरीद, उठान और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी है। मंत्री राजेश नागर ने बताया कि 26 अक्टूबर को सुबह 8 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में कुल 37.27 लाख मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई है और 30.69 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।
नागर ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ लिमिटेड (हैफेड) तथा हरियाणा राज्य भंडारण निगम (एचएसडब्ल्यूसी) के माध्यम से धान की खरीद की जा रही है। 25 अक्टूबर तक उपलब्ध जिला-वार आंकड़ों के अनुसार, कुरुक्षेत्र में 8.23 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 7.64 लाख मीट्रिक टन की खरीद दर्ज की गई है। जिले में 6.47 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है, जो कुल खरीद का लगभग 84.75 प्रतिशत है। कैथल में 6.76 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 5.94 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई है, जबकि 4.55 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठान किया गया है। करनाल में 5.60 लाख मीट्रिक टन की आवक, 4.32 लाख मीट्रिक टन की खरीद और 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक का उठान दर्ज किया गया है।
जिला-वार रिपोर्ट के अनुसार, अंबाला में 4.13 लाख मीट्रिक टन धान की आवक, 3.60 लाख मीट्रिक टन की खरीद और 2.91 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ है। फतेहाबाद में 3.62 लाख मीट्रिक टन से अधिक की आवक और 2.50 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद दर्ज की गई है। यमुनानगर में 3.09 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 2.70 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई है, जबकि 2.31 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठान किया जा चुका है। मंत्री ने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में आवश्यक सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए, किसानों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए और खरीद कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। मंत्री ने कहा कि सभी खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के दौरान धान की खरीद, उठान और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़ेगी तथा प्रदेश के किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।