बददी,सचिन बैंसल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में बददी नगर में स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संघ के सोलन विभाग सह-कार्यवाह डॉ. सोमदत्त शर्मा, सहायक आचार्य, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय नाहन, ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संघचालक नालागढ़ महेश कुमार कौशल ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित के साथ हुआ। इसके बाद शस्त्र पूजन किया गया।
इस अवसर पर डॉ. सोमदत्त शर्मा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, विचारधारा और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं और देश ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छुआ है, लेकिन संघ जिन उद्देश्यों को लेकर आगे बढ़ा था, एक शताब्दी बाद भी उन्हीं लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है। संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने जिन विचारों और उद्देश्यों के साथ की थी, वर्तमान स्वयंसेवक भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। डॉ. सोमदत्त शर्मा ने कहा कि आज का दौर तकनीक, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है।
आधुनिक सुविधाओं ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ परिवारों और बच्चों के बीच भावनात्मक दूरी भी बढ़ रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि माता-पिता बच्चों को बेहतर शिक्षा और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटे हैं, लेकिन कई बार उनके साथ बैठने, उनकी बातें सुनने और उनकी भावनाओं को समझने के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। जहां बच्चे बिना किसी संकोच के अपने विचार साझा कर सकें और बड़ों के साथ सार्थक चर्चा कर सकें। डॉ. सोमदत्त शर्मा के अनुसार, बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक संस्कारों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
दिल्ली आंदोलन से सबक लेने की जरुरत: डा सोमदत्त शर्मा ने कहा कि गत दिनों दिल्ली में आंदोलन हुए लेेकिन वहां बात आंदोलन की नहीं बल्कि वहां यह देखने की बात है कि नौजवान पीढ़ी वहां गंदी गंदी गालियां दे रही थी। यह बात अशोभनीय है क्योंकि हमारी संस्कृति इस प्रकार की नहीं है। हमें अपने बच्चों से और ज्यादा करीब आना चाहिए और 24 घंटे में से एक घंटे उनसे हर रोज सार्थक चर्चा हो देश, समाज, राष्ट्र, परिवार व ज्वलंत मुददों पर। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से युवाओं का चारित्रिक विकास होता है और संघ व्यकित निर्माण का कार्य करता है। हमें स्वयं तो शाखा में आकर संस्कार सीखने चाहिए अपने बच्चों को भी दैनिक शाखा में भेजना चाहिए ताकि उसका सर्वांगीण विकास हो सके।