जालंधरः बीते दिन तेज बारिश आने से जहां गर्मी से राहत मिली है। वहीं बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जिसको लेकर मंडी और खेत में पड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। जालंधर की दाना मंडी में करीब चार लाख 41 हजार टन धान की फसल पड़ी है, जो कुछ तो शैड के नीचे है तो कुछ बाहर खुले में पड़ी है। बीते दिन बारिश आने से बाहर पड़ी फसल सभी गीली हो गई, जिसे किसानों और आढ़तियों को परेशानी में डाल दिया है। वहीं सुबह निकली धूप से आढ़तियों को राहत मिली है। लेबर मंडी में धान को सुखाकर दोबारा बोरियों में भरने का काम कर रहा है।
आपको बता दें शहर में 8 मंडियां आती है, जिसका सभी धान जालंधर में पहुंचता है। उधर, मंडी के अधिकारियों ने बताया कि सरकार और प्रशासन किसानों और आढ़तियों के साथ है। किसी को भी परेशान नहीं होने दिया जाएगा, जितनी भी मंडी में फसल पहुंचेगी उसे खरीदा जाएगा। उन्होंने कल आई बारिश को लेकर पूछे गए सवाल पर बताया कि बरसात को लेकर कृषि विभाग द्वारा पहले ही अलर्ट आ जाता है, जिसको लेकर तिरपाल से फसल को ढक देते है। वहीं कुछ बारिश में फसल भीग भी जाए तो आढ़ती उसे सुखा लेते है। वहीं बारिश कूदरत की देन है, कब बारिश अचानक आ जाए, इसका कुछ पता नहीं।
मंडी में सरकार भी प्रबंध देखते है, अगर बारिश ज्यादा हो जाएं तो प्रशासन भी पूरे इंतजाम करता है। मंडी में मोटरें भी है, जिसे जरूरत पड़ने पर चलाया जाता है। वहीं जालंधर मंडी में अभी तक 4 लाख 41 हजार टन के करीब फसल पहुंच चुकी है, 11 लाख टन तक फसल मंडी में आने की उम्मीद है। किसानों को पैसे को लेकर भी कोई दिक्कत नहीं आने दी जाती है। उन्होंने किसानों से अपील है कि फसल को मंडी में सुखाकर लाएं।
