चंडीगढ़ः पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर आखिरी समय में ऐसा राजनीतिक उलटफेर हुआ कि सुबह तक अध्यक्ष पद के लिए लगभग तय माने जा रहे विजय इंद्र सिंगला का नाम पीछे छूट गया और पूर्व हॉकी कप्तान व जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को कमान सौंप दी गई। 2 अक्टूबर को दिल्ली से चंडीगढ़ तक सिंगला के समर्थक बधाइयों की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आलाकमान ने आखिरी वक्त पर अपना फैसला बदल दिया। परगट सिंह वह हवा के रुख को बखूबी भांप लेते हैं। साल 2017 के चुनाव से पहले अकाली दल-भाजपा गठबंधन की नाव डोलती देखी तो वह जालंधर के वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को बड़ा मुद्दा बनाकर कैंट की राजनीति में हावी हो गए और अकाली-भाजपा गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
इसके बाद कांग्रेस में शामिल हो गए। उनकी यह रणनीति काम आई और वह 2017 में बड़ी जीत के साथ सामने आए। साल 2022 में जब पूरे पंजाब में आम आदमी पार्टी की आंधी चल रही थी, तब भी वह अपना गढ़ बचाने में सफल रहे और इसके पीछे उनकी कुशल रणनीति ही थी। उनकी दूरगामी सोच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह ओलिंपियन हॉकी कप्तान से पंजाब पुलिस के एसपी, डायरेक्टर स्पोर्ट्स तक पहुंचे। वह यहां भी नहीं रुके और पहले अकाली विधायक, फिर दो बार कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने और चन्नी सरकार में कैबिनेट मंत्री तक पहुंच गए। वह 26 सितंबर 2021 से 11 मार्च 2022 तक मंत्री रहे। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव बने और अब पंजाब कांग्रेस प्रधान पद तक पहुंच गए।
वहीं पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2 अक्टूबर को अमरेंद्र सिंह राजा वडिंग ने इस्तीफा देने के बाद राहुल गांधी से निजी मुलाकात की। इस दौरान जब विजय इंद्र सिंगला के नाम की चर्चा सामने आई, तो राजा वडिंग ने आलाकमान के सामने खुलकर इसका विरोध किया। वडिंग ने राहुल गांधी के सामने यह तर्क दिया कि विजय इंद्र सिंगला सीधे तौर पर चन्नी गुट से जुड़े हुए हैं। यदि सिंगला को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो पंजाब कांग्रेस पर पूरी तरह चन्नी गुट का दबदबा कायम हो जाएगा। इससे पार्टी के बाकी सभी गुट अलग-थलग पड़ जाएंगे और चुनाव से पहले संगठन में असंतोष की एक नई लहर उठ खड़ी होगी। राजा वडिंग के इस एक विरोध ने राहुल गांधी और आलाकमान को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया। आलाकमान को स्पष्ट संदेश मिल गया कि सिंगला के नाम पर सर्वसम्मति बनना नामुमकिन है। राजा वडिंग का राहुल गांधी से मिलकर सिंगला के नाम पर वीटो लगाना सबसे निर्णायक मोड़ साबित हुआ। वडिंग का यह दांव सिंगला का खेल बिगाड़ने का सबसे बड़ा कारण बना।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विजय इंद्र सिंगला को पंजाब का अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की थी, जिस पर पार्टी लगभग अपना फैसला ले चुकी थी। पार्टी इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के हिंदू वोट का मुकाबला करने के लिए एक हिंदू चेहरे पर दांव लगाना चाहती थी। राजा वडिंग ने राहुल गांधी से स्पष्ट रूप से कहा कि जीत तभी हासिल की जा सकती है जब पंजाब में कोई जाट सिख प्रमुख हो। इसके अलावा, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिक्रिया दी थी कि चुनाव से ठीक पहले एक हिंदू चेहरे को कमान सौंपने से सिख वोट बैंक को गलत संदेश जा सकता है।
पंजाब के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए, पार्टी को अंततः जाट सिख चेहरे परगट सिंह पर दांव लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान भी कमान एक जाट सिख चेहरे को सौंपना चाहता था, लेकिन भाजपा को घेरने के लिए, उन्होंने एक हिंदू अध्यक्ष बनाने का मन बना लिया था। 2022 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस आलाकमान चरणजीत सिंह चन्नी के काम करने की शैली और फैसलों से खुश नहीं है। सिंगला चन्नी की कलाई से बंधी हुई दिखाई देती है। हालांकि, कुछ समय के लिए विजय इंद्र सिंगला चन्नी गुट से दूर रहे। राजा वडिंग ने अंतिम समय में राहुल गांधी से कहा कि अगर चन्नी गुट के नेता को अध्यक्ष बनाया जाता है तो बाकी संगठन के नेता नाराज हो जाएंगे।
