नई दिल्ली: अमेरिका के साथ बढ़ते हुए तनाव के बीच ईरान ने इस्लामाबाद समझौते के अंतर्गत अपनी सभी जिम्मेदारियां फिलहाल रोक दी हैं। ईरान के इस फैसले के बाद अब पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया दे दी है। पाकिस्तान के सुरक्षा मामलों के एक्सपर्ट्स और भू-राजनीतिक विश्लेषक अली.के चिश्ती ने भी इसे लापरवाह और खतरनाक फैसला बताया है। उनका यह कहना है कि इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और भी ज्यादा बढ़ेगा। इससे सबसे ज्यादा नुकसान ईरान की जनता को भी होगा।
Iran had bombed its entire neighborhood including Pakistan in 2024 and in 2026 in Oman, Qatar, Kuwait, Iraq, UAE, KSA, Bahrain & Syria. Missiles raining on neighbors, oil facilities burning, cities targeted. One rogue actor turning the whole region into a warzone. That’s not…
— Ali K.Chishti Official (@thewirepak) July 18, 2026
इस्लाबाद समझौता का किया उल्लघन
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक मीडिया चैनल से कहा कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान ही इस्लामाबाद समझौते का उल्लंगन किया है। ऐसे में ईरान अब अपनी सुरक्षा के लिए जरुरी कदम उठा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने इस मामले में कहा है कि ईरान तभी इस समझौते का पालन करेगा। जब भी अमेरिका अपनी शर्तों का पालन करेगा। उनका यह साफ कहना था कि समझौता सिर्फ एक पक्ष पर ही लागू नहीं हो सकता है।
लड़ाई का रास्ता चुनना ताकत नहीं है
पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञ अली के चिश्ती ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि ईरान का इस्लामाबाद समझौते से पूरी तरह पीछे हटना बहुत गलत फैसला है। उनके अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता था। ईरान को प्रतिबंधों में राहत मिल सकती थी। तेल निर्यात में छूट मिलती और बातचीत का रास्ता खुला रहता है। उन्होंने यह कहा है कि लड़ाई का रास्ता चुनना कोई ताकत नहीं है बल्कि एक ऐसा कदम है जिससे तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी। इससे पूरे इलाके में अस्थिरता फैल जाएगा। इसके अलावा सबसे ज्यादा परेशानी ईरान की आम जनता को ही होगी।
इस्मालाबाद समझौता हुआ खत्म
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान यह कहा था कि इस्लामाबाद समझौता अब खत्म हो गया है। उन्होंने इसका कारण होर्मुज जलडमरुध्य से जहाजों के आवाजाही को लेकर ईरान के साथ बढ़ता विवाद बताया था।
ईरान के कई हिस्सों में अमेरिका ने किए हमले
शनिवार को अमेरिकी की ओर से ईरान के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में कई सैन्य ठिकानों और लॉजिस्टिक केंद्रों पर हवाई हमले किए हैं। इनमें यज्द और अहवाज के आस-पास के इलाके भी शामिल थे। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं।
60 दिनों का युद्धविराम भी टूटा
इस्लामाबाद समझौते में 60 दिनों तक लड़ाई रोकने, होर्मुज जलडमरुमध्य को दोबारा खोलने और स्थायी समाधान शुरु करने के लिए बातचीत पर भी सहमति बनी थी परंतु अब दोनों देशों के बीच में फिर से हमले शुरु हो चुके हैं। यह समझौता अब लगभग खत्म होता दिख रहा है और पूरे मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ता जा रहा है।
