CM Maan ने ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के मालिकाना हक प्रमाण पत्र बांटे
संगरूर : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरकार द्वारा लाल लकीर के अंदर बने मकानों के मालिकाना हक देने से लोगों का दशकों पुराना इंतजार खत्म कर दिया है। उन्होंने ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत परिवारों को संपत्ति के मालिकाना हक संबंधी प्रमाण पत्र सौंपते हुए इसे ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत बताया, जो लोगों को कानूनी रूप से दर्ज मालिकाना हक, सीमांकन के नक्शे और बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध करवाएगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ गरीबों, दलितों और भूमिहीन परिवारों को मिलेगा, जिनके मकान पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। दूसरी ओर, सही नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड से लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति संबंधी विवादों को निपटाने में मदद मिलेगी। धूरी में मालिकाना हक प्रमाण पत्र वितरित करने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य ने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही लगभग 4,000 गांवों में संपत्तियों की रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
धूरी को 47 करोड़ रुपये का जल प्रोजेक्ट तोहफे के रूप में दिया गया है। उन्होंने कहा कि खेती योग्य 88 प्रतिशत भूमि और टेलों तक नहरी पानी पहुंचने से हमारे किसानों की फसल पैदावार बढ़ी है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पंजाब का अग्रणी होना तथा शून्य बिजली बिल अब जमीनी हकीकत बन चुके हैं। पंजाबी केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य निस्वार्थ भाव से पंजाब की सेवा करना है और पंजाबी किसी की धौंस बर्दाश्त नहीं करते।
मुख्यमंत्री मान ने कहा, “‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का मुख्य उद्देश्य हर योग्य परिवार को उसके अपने घर का स्पष्ट मालिकाना हक और दस्तावेजी मान्यता देना है। सरकार का संकल्प है कि हर योग्य परिवार का घर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो और उसे मालिकाना हक की पुष्टि करने वाला दस्तावेज मिले। यह प्रयास लोगों के अधिकारों, स्वाभिमान और भविष्य की सुरक्षा को मजबूत करेगा।”
गांवों में कई परिवार पीढ़ियों से लाल लकीर के अंदर अपने घरों में रह रहे हैं और औपचारिक मालिकाना रिकॉर्ड न होने के कारण उन्हें अक्सर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जिस घर में परिवार की कई पीढ़ियां रही हों, उसका स्पष्ट मालिकाना दस्तावेज होना बेहद जरूरी है। इसलिए ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का प्रमुख उद्देश्य योग्य परिवारों को उनके घरों की कानूनी मान्यता प्रदान करना है।”
इस योजना के तहत संपत्तियों की निशानदेही और नक्शे तैयार करने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वेक्षण के माध्यम से घरों की स्थिति और सीमाओं की पहचान की जा रही है तथा स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से स्थापित करना और संपत्ति के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाना है, ताकि भविष्य में स्वामित्व को लेकर कोई भ्रम न रहे।”
प्रॉपर्टी कार्ड जारी होने से योग्य लाभार्थियों को अपने घरों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेजी मान्यता और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। घरों की सीमाओं और स्वामित्व के स्पष्ट रिकॉर्ड से आपसी गलतफहमियों और संपत्ति विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि औपचारिक प्रॉपर्टी रिकॉर्ड उपलब्ध होने से बैंकों से ऋण लेने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है, लेकिन ऋण की मंजूरी संबंधित बैंक के नियमों और पात्रता शर्तों पर ही निर्भर करेगी।
