नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के सैन्य अधिकारी ईरान पर संभावित हमलों के लिए टारगेट की लिस्ट बना रहे हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच जल्द ही ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई शुरु करने की योजना बन रही है।
इजरायली सेना और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इमरजेंसी मीटिंग की है। संयुक्त रुप से ईरान के जरुरी ठिकानों की लिस्ट तैयारी की जा रही है। यह तैयारी अगले हफ्ते तक हमला शुरु करने जितनी तेजी से चल रही है। वर्तमान में अप्रैल 8 को लगा युद्धविराम पूरी तरह लाइफ सपोर्ट पर चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कहा है कि ईरान के साथ शांति की कोशिशें लगभग खत्म हो चुकी हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत भी पूरी तरह फेल हो गई है। ईरान ने बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरा संप्रभु अधिकार और नई प्रबंधन व्यवस्था की मांग की थी। इसे ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है। इजरायली न्यूज एजेंसी KAN के सूत्रों के अनुसार, इजरायल अमेरिका पर लगातार दबाव डाल रहा है कि युद्ध फिर शुरु किया जाए। इजरायली के नेतृत्व का कहना है कि ईरान के खिलाफ पहले चरण का युद्ध उस समय से पहले खत्म कर दिया गया।
जब इसे पूरा होना चाहिए था। इजरायल अब ईरान की बची हुई परमाणु सुविधाओं और मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह नष्ट करना चाहता है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारी मिलकर ईरान के अंदर जरुरी टारगेट्स की एक संयुक्त सूची तैयार कर रहे हैं। इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्लांट, मिसाइल फैक्टरियां, सैन्य अड्डे और कमांड सेंटर शामिल हो सकते हैं।
दोनों देशों का यह मानना है कि यदि अभी कार्रवाई नहीं की गई तो ईरान से मजबूत हो जाएगा और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से दुनिया का बहुत बड़ा तेल निर्यात होता है। ईरान ने इस पर अपना पूरा नियंत्रण मांगा था जिसे अमेरिका और इजरायल दोनों से मना कर दिया है।
यदि युद्ध शुरु हुआ तो इस खाड़ी में तेल आपूर्ति प्रभावित होगी जिसका असर पूरी दुनिया की पर पड़ेगा। फिलहाल दोनों तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन सैन्य स्तर पर तैयारी तेज हो गई है। इजरायल का मानना है कि ईरान की परमाणु क्षमता को हमेशा के लिए खत्म करने का यह आखिरी मौका हो सकता है। अमेरिका भी ईरान को मजबूत होने से रोकना चाहता है।
ट्रंप का प्रशासन का रुख सख्तम है वो ईरान की किसी भी शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। यदि बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकला तो अगले कुछ दिनों या हफ्तों में ईरान पर हमला शुरु हो सकता है। ईरान पर कोई भी बड़ा हमला अब मध्य पूर्व को अस्थिर कर देगा। लेबनान, सीरिया, यमन और ईराक जैसे देशों में तनाव बढ़ सकता है। तेल की कीमतें आस-मान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है क्योंकि भारत ईरान से तेल आयात करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर तेल आता है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पहुंच गया है। सैन्य तैयारी तेज होने के साथ ही कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं लेकिन फिलहाल सफलता मिलती नहीं दिख रही हैं।

