नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी तनाव और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक संकट का असर महंगाई पर भी पड़ रहा है। भारत में भी महंगाई का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सितंबर में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। सरकार की ओर से सोमवार को जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इससे पहले अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी।
सितंबर में क्यों बढ़ी महंगाई
देश में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है। सब्जियों और रोजमर्रा के इस्तेमाल की कुछ जरूरी चीजों के महंगे होने से आम लोगों के घरेलू खर्च पर असर पड़ रहा है।
खुदरा महंगाई दर का आकलन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर किया जाता है। यह सूचकांक बताता है कि आम लोग खाने-पीने की चीजों, कपड़ों, घर और दूसरी जरूरी सेवाओं पर कितना खर्च कर रहे हैं और उनकी कीमतों में कितना बदलाव हुआ है।
जनवरी में लागू की गई नई सूचकांक श्रृंखला के तहत सितंबर में महंगाई दर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। अगस्त में यह दर 4.83 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई।
खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हुई
सितंबर में खाने-पीने की चीजों की महंगाई ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। खाद्य महंगाई दर अगस्त के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई।खाद्य महंगाई दर का मतलब है कि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले खाद्य पदार्थों की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। जब खाने-पीने की चीजें महंगी होती हैं, तो परिवारों का मासिक बजट बिगड़ने लगता है। खासकर कम और मध्यम आय वाले परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च होता है।
प्याज की महंगाई ने बढ़ाई सबसे ज्यादा परेशानी
सितंबर में प्याज की कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्याज की महंगाई दर अगस्त के 48.78 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 108.09 प्रतिशत हो गई।इसका मतलब है कि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले प्याज की कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई। प्याज भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली जरूरी सब्जियों में शामिल है। ऐसे में इसकी कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
- प्याज: महंगाई दर अगस्त के 48.78 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 108.09 प्रतिशत हो गई।
- लहसुन: महंगाई दर 43.60 प्रतिशत से बढ़कर 54.62 प्रतिशत पर पहुंच गई।
- नींबू: महंगाई दर अगस्त के 15.15 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 36.41 प्रतिशत हो गई।
इन आंकड़ों से साफ है कि रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजें सितंबर में पहले के मुकाबले ज्यादा महंगी हुईं।
आलू और टमाटर की कीमतों में मिली कुछ राहत
जहां एक ओर प्याज, लहसुन और नींबू के दाम बढ़े, वहीं कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई। सितंबर में आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 11.50 प्रतिशत की कमी आई। इसी तरह टमाटर की कीमतें भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 8.62 प्रतिशत कम रहीं। इससे लोगों को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन दूसरी जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कुल खाद्य महंगाई दर में इजाफा हुआ।
चांदी के गहनों की महंगाई भी काफी ज्यादा
सितंबर में चांदी के गहनों की कीमतों में भी काफी तेजी देखने को मिली। चांदी के गहनों की महंगाई दर 87.80 प्रतिशत रही। हालांकि, अगस्त में यह दर 106.81 प्रतिशत थी। यानी अगस्त के मुकाबले इसमें कुछ कमी आई, लेकिन यह अब भी बहुत ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। चांदी के गहनों की कीमतों में बढ़ोतरी से उन लोगों का खर्च बढ़ सकता है, जो चांदी के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में 6 प्रतिशत से ऊपर पहुंची महंगाई
सितंबर में महंगाई का असर ग्रामीण भारत में ज्यादा देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 5.24 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 6.08 प्रतिशत हो गई। इस तरह ग्रामीण महंगाई दर 6 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई। वहीं, शहरी इलाकों में भी महंगाई बढ़ी। यहां खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.31 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 4.88 प्रतिशत हो गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई बढ़ने का असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जिनकी आय सीमित है और जो खाने-पीने की चीजों पर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च करते हैं। शहरी परिवारों को भी बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बजट संभालने में परेशानी हो सकती है।
RBI के महंगाई लक्ष्य से ऊपर पहुंची दर
सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत होने के साथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के महंगाई लक्ष्य से ऊपर चली गई। हालांकि, यह अभी भी आरबीआई की तय स्वीकार्य सीमा 2 से 6 प्रतिशत के भीतर है।
आरबीआई महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए मौद्रिक नीतियों का इस्तेमाल करता है। इनमें रेपो रेट एक महत्वपूर्ण साधन है। रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बदलाव का असर बैंकों की ब्याज दरों और आगे चलकर आम लोगों के कर्ज पर पड़ सकता है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई ने पिछले सप्ताह महंगाई की चिंताओं के बीच रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
आम लोगों की जेब पर क्या पड़ेगा असर
महंगाई बढ़ने का सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। जब सब्जियां, अनाज और दूसरी जरूरी चीजें महंगी होती हैं, तो लोगों को समान सामान खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
