चंडीगढ़ : अमृतपाल सिंह को को लेकर पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि उसके चाचा हरजीत सिंह उसे सरेंडर करवाना चाहते थे लेकिन वह अपने दोस्त पपलप्रीत के कहने पर फरार हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि अमृतपाल सिंह ने अपने चाचा से अधिक पपलप्रीत सिंह पर विश्वास किया। इसीलिए अमृतपाल सिंह में उसके साथ भागने का फैसला किया।
पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि अमृतपाल और चाचा हरजीत सिंह जालंधर में ही अलग हो गए थे। चाचा हरजीत सिंह ने पुलिस की सख्ताई देखते हुए सरेंडर करने का फैसला किया था। इतना ही नहीं, हरजीत सिंह ने किसी व्यक्ति को फोन करके अपने सरेंडर की बात कही थी। इसके साथ ही अमृतपाल को भी सरेंडर करने के लिए कहा था।
लेकिन अमृतपाल सिंह को सरेंडर ना करने और उसे भगोड़ा बनाने के लिए पपलप्रीत की गाइडेंस थी। पुलिस जांच में सामने आया कि अमृतपाल सिंह ने इस मोड़ पर अपने चाचा की बात मानने की जगह पपलप्रीत सिंह को सुन भागने का फैसला किया। इतना ही नहीं, पपलप्रीत सिंह ही वह इंसान था, जिसने कुछ ही घंटों में अमृतपाल के भागने की पूरी प्लानिंग भी कर दी।
पुलिस को 10 दिन पहले की अमृतपाल सिंह की लोकेशन मिली, जो यूपी के पीलीभीत एरिया की है। पुलिस का अनुमान है कि पंजाब से निकलने के बाद अमृपताल सिंह ने दोबारा यूपी-नेपाल बॉर्डर पर बने डेरों को अपना ठिकाना बनाया है। जिसके बाद पुलिस लगातार उत्तरप्रदेश के डेरों में सर्च चलाए हुए है।
