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Punjab News: अटकी कीरतपुर साहिब-नंगल फोरलेन परियोजना, जानें मामला

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चंडीगढ़ः करोड़ों रुपए की लागत से तैयार होने वाली कीरतपुर साहिब-नंगल राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-503) को फोरलेन बनाने की बहुप्रतीक्षित परियोजना अटक गई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पिछले वर्ष इस परियोजना को मंजूरी दी थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना अब तक जारी नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि 14 गांवों के मूल राजस्व रिकॉर्ड गायब होने के कारण काम पर ब्रेक लग गई। जिन 14 गांवों के राजस्व रिकार्ड गायब हैं, उनमें सहजोवाल, मेघपुर, मानकौर, अजौली, निक्कू नंगल, नंगली, कलसेरा, बंडलेहरी, दुकली, जोल, सगतपुर, कुलग्रां, भट्टों और दरोली शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि भूमि विवाद सुलझने और सरकारी जमीन की स्पष्ट पहचान होने के बाद ही विकास परियोजनाओं को गति मिल सकेगी।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित मार्ग में आने वाले 14 गांवों के मूल राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। इसी वजह से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। राजस्व विभाग अब उन गांवों को फिलहाल छोड़कर बाकी क्षेत्र के लिए अधिग्रहण अधिसूचना जारी करने पर विचार कर रहा है। हालांकि इसके लिए एनएचएआई की मंजूरी आवश्यक होगी। नंगल के एसडीएम सचिन पाठक ने स्वीकार किया कि 14 गांवों के राजस्व रिकार्ड उपलब्ध न होने के कारण फोरलेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में तहसीलदार, नंगल ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर बताया था कि गांव निक्कू नंगल के खसरा नंबर 401, 402 और 403 के स्वामित्व रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं।

लोगों से प्रमाणित दस्तावेज जमा कराने को कहा गया था। यदि कोई दावा या दस्तावेज प्राप्त नहीं होता है तो पंजाब भूमि राजस्व अधिनियम, 1887 की धारा 42(3)(बी) के तहत संबंधित भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित किया जा सकता है। प्रशासन ने राजस्व रिकार्ड गायब होने के मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। पिछले कुछ वर्षों में सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से रिकार्ड दोबारा तैयार करने का प्रयास किया गया, लेकिन भूमि स्वामित्व का पूरा विवरण बहाल नहीं हो सका। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड के अभाव में भूमि नामांतरण, सीमांकन और अधिग्रहण जैसी नियमित राजस्व प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं। साथ ही सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।

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