चंडीगढ़ः पेट्रोल-डीजल के बढ़ते संकट के बीच अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासनिक स्तर पर अहम कदम उठाए हैं। हाईकोर्ट की ओर से जारी सर्कुलर में जजों, कर्मचारियों और वकीलों के लिए कार-पूलिंग को बढ़ावा देने की अपील की है। इसी के साथ हाईकोर्ट के प्रत्येक अनुभाग में 33 प्रतिशत तक कर्मचारियों को ‘घर से काम करने’ की अनुमति दी गई। वहीं अधिकांश मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करने और प्रशासन को तकनीकी सुविधाएं सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

सर्कुलर में बताया गया कि यह फैसला भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 12 मई 2026 के ऑफिस मेमोरेंडम तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 मई को जारी सर्कुलर के आधार पर लिया गया है। ईंधन के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट के जजों से आपसी कार-पूलिंग व्यवस्था अपनाने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों को भी सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हाईकोर्ट ने अधिकांश मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करने का निर्णय लिया है। बार सदस्यों से भी वर्चुअल सुनवाई को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की गई है।
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सर्कुलर के अनुसार, जिन शाखाओं या सेक्शनों में संभव होगा वहां अधिकतम 33 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जाएगी। हालांकि शेष स्टाफ को कार्यालय में उपस्थित रहकर कामकाज सुचारु रूप से चलाना होगा। संबंधित रजिस्ट्रार प्रत्येक सप्ताह रोस्टर तैयार करेंगे और यह तय करेंगे कि किन कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जा सकती है। वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों को हर समय फोन पर उपलब्ध रहने और आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय आने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी शाखा में कार्य की प्रकृति को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था प्रभावी नहीं पाई जाती, तो संबंधित रजिस्ट्रार रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति से इस व्यवस्था में बदलाव या प्रतिबंध लगा सकते हैं।
