मलेरकोटलाः डेयरी यूनियन द्वारा दूध के दामों में बढ़ौतरी कर दी है। दरअसल, असलम अछू प्रधान की मौजूदगी में एक अहम मीटिंग हुई, जिसमें महंगाई को देखते हुए और पशुओं के चारे और पशुओं के बढ़े रेट और अन्य कई तरह के खर्चों को देखते हुए सभी सदस्यों की मौजूदगी में यह फैसला किया गया है कि 01/10/2026 को दूध का रेट 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला किया गया है। इसमें हाजी बिंदू, इकबाल, लियाकत अली (मीना), असलम बिट्टू, आमिर बाबू, मुस्तफा बिंदू, हाजी बाबू, काला, भोलू, सोनी, काका, रोमी सरपंच, यासीन और दूसरे सदस्य हाजिर थे। पहले दूध के रेट 70 और 75 रुपये मिक्स के थे, जिस कारण अब 5 रुपये का वर्धा कर दिया गया है, क्योंकि उनका कहना है कि लगातार फीड हरा चारा और पशु पालन महंगा होने के कारण अंत में यह फैसला लेना पड़ा।
भले ही अन्य इलाकों में दूध के रेट 100 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए गए हैं पर उन्होंने केवल 5 रुपये ही वर्धा किया है। साथ ही डेयरी फार्मर मलेरकोटला ने लोगों से अपील की है कि वे नकली और मिलावटी दूध से दूर रहें जिससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मीटिंग के बाद डेयरी फार्मर के नेताओं ने बताया कि पहले दूध के मिक्स रेट 70 और 75 रुपये प्रति लीटर थे। अब इन कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर का वर्धा किया गया है। नेताओं के मुताबिक पशुओं की फीड, हरे चारे और अन्य संभाल-संभाल के खर्चों में लगातार वर्धा होने के कारण यह फैसला लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि भले ही कई अन्य इलाकों में दूध के रेट बढ़ाकर 100 रुपये प्रति लीटर कर दिए गए हैं, पर मलेरकोटला के डेयरी फार्मर ने केवल 5 रुपये प्रति लीटर का वर्धा किया है।
डेयरी फार्मर मलेरकोटला ने लोगों से अपील की है कि वे नकली और मिलावटी दूध से बचें। उन्होंने कहा कि मिलावटी दूध की इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकती है। उल्लेखनीय है कि देश के विभिन्न हिस्सों में दूध की कीमतों में वर्धा देखने को मिल रहा है। मुंबई में भी 1 सितंबर से डेयरी दूध की कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर का वर्धा किया गया है। इसके बाद 93 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला दूध अब 102 रुपये प्रति लीटर हो गया है। दूध उत्पादकों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों दौरान डेयरी फार्म चलाने की लागत में काफी वर्धा हुआ है। अनाज समेत पशुओं की फीड और अन्य चारे की कीमतों में 25 प्रतिशत तक वर्धा होने का दावा किया गया है। इसके अलावा चारे और तेल की खल की वर्धी कीमतों ने भी दूध उत्पादन की कुल लागत को प्रभावित किया है। उत्पादकों का कहना है कि बढ़ रही उत्पादन लागतों के मद्देनजर दूध की कीमतों में संशोधन करनी जरूरी हो गई है।