चंडीगढ़: राज्य भर के लाखों परिवारों के सामाजिक-आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए आज पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक व्यापक प्रस्ताव पारित करते हुए पुष्टि की कि पंजाब के लोगों को मिलने वाली जनकल्याणकारी योजनाएं और प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ निरंतर जारी रहेंगे।
सदन में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव में दृढ़ता से कहा गया कि पंजाब के संसाधन यहां के लोगों के हैं और निर्वाचित सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है कि वह इन संसाधनों का उपयोग लोगों को वित्तीय सम्मान, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं और घरेलू जरूरतों के लिए वश्यक राहत प्रदान करने के लिए करे।
सदन ने जनकल्याणकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च को “पैसे की बर्बादी” बताने के प्रयासों को पूरी तरह खारिज कर दिया। प्रस्ताव पेश करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जोर देकर कहा, “प्रत्यक्ष सहायता उन माताओं को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करती है, जो घर का मासिक बजट संभालती हैं। यह खेतों में काम करने वाले किसानों और अचानक चिकित्सा संकट का सामना कर रहे परिवारों को भी सहारा देती है।” विधानसभा ने स्पष्ट किया कि सरकारी सहायता नागरिकों के सम्मान, आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता को कम नहीं करती, बल्कि उन्हें और अधिक मजबूत बनाती है।
इस प्रस्ताव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं के उन बयानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई, जिनमें मौजूदा जनकल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता को बंद करने की खुलकर वकालत की गई थी। प्रस्ताव में उन बयानों की भी कड़ी निंदा की गई, जो इस कानूनी सहायता का लाभ प्राप्त करने वाली महिलाओं और कमजोर वर्गों का अपमान करते हैं। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रत्यक्ष जनसहायता का विरोध किए जाने की भी निंदा की गई।