विद्यार्थियों और शिक्षकों को भूकंप, अग्नि सुरक्षा, प्राथमिक उपचार एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया का दिया जाएगा प्रशिक्षण
ऊना,सुशील पंडित: हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत आगामी छ: महीनों में जिला ऊना के सभी सरकारी एवं निजी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्कूल आपदा तैयारी एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक जानकारी, व्यावहारिक कौशल तथा सुरक्षा उपायों से प्रशिक्षित करना है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि यह कार्यक्रम स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम के तहत आयोजित किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में जिला के कुल 201 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में यह कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें 141 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल तथा 60 निजी विद्याल शामिल हैं। इन स्कूलों में प्रत्येक माह प्रशिक्षित टीमों द्वारा भूकंप के दौरान ‘ड्रॉप, कवर एंड होल्ड’ सुरक्षा अभ्यास, परिवार आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने तथा फैमिली इमरजेंसी किट के संबंध में जानकारी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त आपातकालीन प्रतिक्रिया उपकरणों एवं साधनों का प्रदर्शन, बेसिक कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) तथा प्राथमिक उपचार तकनीकों का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। यह पहल आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 तथा राष्ट्रीय स्कूल सुरक्षा नीति के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है।
उपायुक्त ने बताया कि कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय में लगभग एक घंटा 30 मिनट का आपदा तैयारी एवं प्रदर्शन सत्र आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को विभिन्न आपदाओं के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं की जानकारी देने के साथ उनका व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया जाएगा।इसके अलावा विद्यार्थियों और शिक्षकों को अग्नि सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करने के साथ अग्निशामक यंत्रों के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया तथा इमरजेंसी इवैकुएशन ड्रिल भी करवाई जाएगी, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में विद्यार्थी और विद्यालय स्टाफ संयम एवं तत्परता के साथ आवश्यक कदम उठा सकें।
उपायुक्त ने बताया कि यह पहल विद्यार्थियों को केवल आपदा के समय सुरक्षित रहने की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें सुरक्षा, सजगता, त्वरित प्रतिक्रिया और सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। विद्यालय स्तर पर नियमित प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिल से विद्यार्थी आपात परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा के साथ-साथ दूसरों की सहायता करने के लिए भी अधिक सक्षम बन सकेंगे।