वह केवल समय काट रहे हैं, इसलिए दूर-दराज के कम आबादी वाले क्षेत्रों को खोज-खोजकर कोरी घोषणाएं कर रहे हैं। लाहौल, पांगी, डोडरा-क्वार और अब किन्नौर में भी घोषणाएं कर दी गई हैं। जब गारंटियां पूरे प्रदेश को दी थीं, तो घोषणाओं में गिने-चुने क्षेत्रों के नाम ही क्यों शामिल किए जा रहे हैं? जो चुनावी गारंटियां दी गईं, वे न तो पूरी हुई हैं और न ही सरकार उन्हें पूरा करेगी।
आखिर इस पूरे प्रकरण में बदनामी किसकी हुई? गरिमा किसकी गिरी? माननीय सदन और सरकार की। लेकिन सरकार को इन बातों की कोई परवाह नहीं है। जो मन में आता है, वही किया जा रहा है, चाहे परिणाम कुछ भी हों। उन्होंने कहा कि चुनावों में भी इसी तरह मनमानी की जा रही है और अदालत से फटकार मिल रही है।
बिना सोचे-समझे, बिना नियम-कानून के फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे हर दिन सरकार की किरकिरी हो रही है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर पूरी व्यवस्था का मजाक बना दिया गया है। पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकाघाट में बिटिया के हत्याकांड पर सरकार ने संवेदनहीनता दिखाई है और अब मुख्यमंत्री व उनकी टीम चाहती है कि विपक्ष इस पर आवाज भी न उठाए।
हमें क्या बोलना है और क्या नहीं, यह मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकते। उन्हें अपना काम करना चाहिए। प्रदेश में माफिया बेखौफ घूम रहा है, दिनदहाड़े गोलियां चल रही हैं, बेटियों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, और सरकार हमें ही ज्ञान दे रही है।
