ऊना/सुशील पंडित: राजकीय महाविद्यालय ऊना के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस अत्यंत उत्साह, बौद्धिक ऊर्जा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के साथ मनाया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में जमीनी लोकतंत्र के प्रति समझ और सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम के अंतर्गत विविध शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। एक वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई।
जिसमें निम्नलिखित समसामयिक विषयों पर गहन चर्चा हुई:
“फ्रीबी संस्कृति: क्या प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाएं पंचायतों की भूमिका को कमजोर करती हैं और व्यक्ति को समुदाय के बजाय राज्य पर निर्भर बनाती हैं?”
“प्रॉक्सी नेतृत्व से आगे: क्या महिलाओं के लिए 50% आरक्षण वास्तव में सशक्तिकरण लाया है या यह ‘प्रधान-पति’ संस्कृति के रूप में पितृसत्ता का नया रूप है?”
विद्यार्थियों ने अपने तर्कों में गहराई और संतुलन का परिचय दिया। एक प्रतिभागी ने कहा, “सशक्तिकरण केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति तक पहुँचना चाहिए।” एम.ए. राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित नारा लेखन गतिविधि ने कार्यक्रम में रचनात्मकता का संचार किया। “मजबूत पंचायत, मजबूत लोकतंत्र” और “गाँव की आवाज़, देश की ताकत” जैसे नारों ने सभी को प्रेरित किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मॉक ग्राम सभा रही, जिसमें विद्यार्थियों ने पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अधिकारियों की भूमिकाएं निभाईं।
इस गतिविधि में डिजिटल साक्षरता की कमी, नशा उन्मूलन तथा कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए। एक छात्र ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “इस मॉक ग्राम सभा ने हमें यह समझाया कि लोकतंत्र की असली ताकत गाँवों से ही शुरू होती है और हर नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है।” इस अवसर पर विकास सैनी, सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) द्वारा एक व्याख्यान भी प्रस्तुत किया गया। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के ऐतिहासिक विकास को विस्तार से समझाते हुए युवाओं की भूमिका पर विशेष बल दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की नींव हैं। युवाओं को आगे आकर न केवल मतदान करना चाहिए, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभानी चाहिए।” उन्होंने विद्यार्थियों को “जागरूकता के दूत” बनने का आह्वान करते हुए समाज में पंचायतों की भूमिका के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और ग्रामीण विकास के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा के साथ हुआ।
