ऊना, (27 अप्रैल) सुशील पंडित : राजकीय महाविद्यालय ऊना के स्नातकोत्तर (पी.जी.) अर्थशास्त्र विभाग ने अपने शैक्षणिक एवं शोध कार्यक्रम के अंतर्गत तहसील बंगाणा के गांव रायपुर मैदान और मंदली में एक विस्तृत सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक आर्थिक, सामाजिक तथा आधारभूत संरचनात्मक स्थिति का गहन अध्ययन करना रहा।
यह महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। विभाग के प्राध्यापक डॉ. भगवान दास, डॉ. शाम सिंह बैंस तथा प्रो. मनजीत सिंह मान के निर्देशन में कुल 45 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विद्यार्थियों ने अनुशासन, समर्पण एवं टीम भावना के साथ फील्ड में कार्य करते हुए सर्वेक्षण को सफल बनाया।

सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने लगभग 140 परिवारों (households) से घर-घर जाकर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया और उनके सामाजिक-आर्थिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी एकत्रित की। इस डेटा संग्रहण में परिवार संरचना, शिक्षा स्तर, रोजगार एवं आय के स्रोत, कृषि गतिविधियां, आवास की स्थिति तथा मूलभूत सुविधाओं—जैसे स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय, एलपीजी गैस और इंटरनेट—की उपलब्धता का विश्लेषण किया गया।
इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति तथा मनरेगा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सरकारी योजनाओं के लाभों की पहुंच का भी आकलन किया गया।

सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने डेटा संग्रहण में आने वाली चुनौतियों को भी अपने प्राध्यापकों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर लोगों ने प्रारंभ में जानकारी देने में झिझक दिखाई तथा कुछ परिवारों ने निजी जानकारी साझा करने में संकोच किया। इसके अलावा दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, समय की कमी, भाषा व संचार से जुड़ी कठिनाइयां तथा अधूरी या अस्पष्ट जानकारी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। हालांकि, प्राध्यापकों के मार्गदर्शन और टीमवर्क के माध्यम से विद्यार्थियों ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया और सर्वेक्षण को पूर्ण किया।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों में यह सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसर, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं तक सीमित पहुंच तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों में पर्यटन एवं सहायक गतिविधियों के माध्यम से आय के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी देखी गईं। प्राचार्य डॉ. मीता शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के फील्ड सर्वे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उनके शोध कौशल को सुदृढ़ बनाते हैं। यह पहल विद्यार्थियों के समग्र विकास के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को उजागर करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
