जालंधर, ENS: शहीद उधम सिंह नगर में स्थित एक अस्पताल में भारी हंगामा हो गया। दरअसल, 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का दावा है कि उन्होंने माता गुरदेव कौर को आयुष्मान कार्ड (सरकारी स्कीम) और10 लाख रुपए बीमा योजान के जरिए अस्पताल में भर्ती करवाया था। महिला सतविंदर कौर ने कहा कि ने उनकी माता को सरकारी अस्पताल से अस्पताल में सरकारी कार्ड के जरिए ईलाज के लिए एबुलेंस चालक ले आया और कहा गया कि अस्पताल में उनका सिर्फ 7 हजार रुपए का खर्च आएगा। महिला का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने उनसे पहले 10 हजार रुपए जमा करवाए, जिसके बाद 10 हजार टेस्ट के लिए जमा करवाए, उसके बाद दवाईयों के लिए 7 हजार जमा करवाए।
महिला ने कहा कि माता आज सुबह बिल्कुल ठीक थी और वह बातें कर रही थी। इस दौरान आज दोबारा स्टाफ के कर्मियों ने 2 हजार रुपए मांगने शुरू कर दिए। महिला ने कहा कि जब उन्हें सरकारी कार्ड से उपचार के लिए कहा तो स्टाफ द्वारा कहा गया पैसे जमा करवाने के बाद कार्ड के जरिए ईलाज शुरू कर दिया जाएगा। महिला का कहना है कि जिसके बाद जब उसने किसी परिजन का स्टाफ को फोन करवाया तो स्टाफ द्वारा ईलाज शुरू कर दिया गया, लेकिन अब स्टाफ ने कहा कि मरीज की हालत गंभीर है और रैफर करने के लिए कह दिया गया।
सतविंदर का आरोप है कि कार्ड शुरू करने के 15 मिनट बाद माता को पाइपों से ढक दिया और माता की हालत काफी गंभीर बनी हुई है। वहीं बेटे हरकेश कुमार ने कहा कि उनके मरीज को स्टाफ द्वारा वेटिंलेटर पर रख दिया गया। व्यक्ति ने कहा कि 15 मिनट पहले मरीज बात कर रहा था और कार्ड से ईलाज शुरू होने के बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई। हालांकि स्टाफ द्वारा आरोपों को सिरे से खारिज किया गया। इस घटना को लेकर परिजनों द्वारा जमकर हंगामा किया गया। दूसरी ओर, अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) नरिंदर कुमार ने कहा कि 75 वर्षीय गुरदेव कौर मरीज उनके पास उपचार के लिए आया है। उन्होंने कहा कि मरीज के परिजन 8 से 9 अस्पतालों से जवाब मिलने के बाद वह उन्हें बीते दिन शाम को अस्पताल में उपचार के लिए लेकर आए थे।
नरिंदर कुमार ने कहा कि मरीज वेंटिलेटर पर है और उन्हें हार्ट की समस्या है। मरीज के परिजनों को हालत गंभीर होने को लेकर पहले ही जागरूक कर दिया गया था। नरिंदर ने कहा कि किसी के फोन आने पर उनके स्टाफ द्वारा अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहीं सरकारी कार्ड स्कीम से ईलाज शुरू होने के बाद ईलाज में हालत गंभीर होने को लेकर उन्होंने सिरे से खारिज किया है। मरीज की हालत पहले से ही अत्यंत नाजुक थी और उनके दिल की स्थिति (NT-proBNP लेवल) सामान्य से कई गुना खराब थी। उधर, मरीज के साथ आए अमरीक सिंह ने भी गुस्से में आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन का ध्यान सिर्फ पैसों पर है। उन्होंने कहा कि अभी तक मरीज को केवल एक बोतल चढ़ाई गई है, लेकिन अस्पताल बार-बार रुपयों की मांग कर रहा है। उनका सवाल है कि जब सरकार इलाज के पैसे दे रही है, तो अस्पताल परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान क्यों कर रहा है।
