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Jalandhar News: बदलते मौसम से अस्पताल में बढ़ी डायरिया मरीजों की संख्या, डॉक्टर का आया बयान, देखें वीडियो

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जालंधर, ENS: बारिश के साथ ही शहर में जलभराव और दूषित पानी की समस्या ने अपने पैर पसार लिए हैं। इसका सीधा असर मासूम बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। पिम्स के बाल रोग विभाग (पीडियाट्रिक्स) की ओपीडी में डायरिया (उल्टी-दस्त) से पीड़ित बच्चों की संख्या में बढ़ गई है। मामले की जानकारी देते हुए डॉक्टर निरंकार सिंह नेकी ने बताया कि मौसम में लगातार बारिश के साथ धूप निकलने से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में उनके पास 10 मरीजों में से 4 मरीज दस्त के आ रहे है। मरीजों की जांच के दौरान मरीजों में पानी की कमी पाई जा रही है और उनकी जीभ सूख रही होती है, ब्लड प्रैशर लैवल 100 से भी कम पाया जा रहा है।

जिसके चलते मरीज को अस्पताल में भर्ती करके उनका उपचार किया जा रहा है। इसके कई तरह से वायरस मुख्य कारण है। दरअसल, कई जगह पर पीने वाला सही नहीं पाया जा रहा। उन्होंने कहा कि मानसून आते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में बढ़ौतरी देखने को मिल रही है। डॉक्टर ने बताया कि उमस भरे मौसम में दूषित पेयजल और रेहड़ी-पटरी पर बिकने वाले खुले व बासी खाद्य पदार्थ बच्चों को तेजी से बीमार कर रहे हैं।

मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) और प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि जिस भी एरिया में पानी के सैंपल फेल पाए जा रहे हैं, वहां तुरंत पेयजल सप्लाई लाइनों की लीकेज और मेंटेनेंस का काम युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डायरिया का समय रहते सही ईलाज ना किया जाए तो उसकी हालत गंभीर हो सकती है। इस दौरान नकोदर से मलकीत सिंह मरीज का उदाहरण देते हुए डॉक्टर ने कहाकि उसे 3 से 4 दिन से दस्त की समस्या थी और उसे कोई आराम नहीं आ रहा था। उन्होंने कहाकि अस्तपाल में गंभीर मरीज आ रहे है।

डायरिया के लक्षण

अगर, डायरिया लंबे समय तक बना रहें या गंभीर हों, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में डायरिया के मामलों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है क्योंकि ये समूह निर्जलीकरण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। डायरिया के निम्नलिखित लक्षण:

  • दिन में कई बार पानी जैसा या बहुत ही पतला मल त्याग होना।
  • पेट में अचानक से दर्द होना या ऐंठन महसूस होना।
  • उल्टी आना या मतली महसूस होना।
  • शरीर का तापमान बढ़ना और बुखार आना।
  • तेजी से वजन घट जाना, खासकर बच्चों में।
  • शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना और थकावट रहना।
  • मल में खून या मवाद का दिखना, जो कि गंभीर संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी होना जिससे प्यास बढ़ जाती है। निर्जलीकरण के अन्य संकेतों में मुंह का सूखना, आंखों का धंसा हुआ दिखना, और पेशाब की कमी शामिल है।

डायरिया से बचाव

  • खाना बनाने और खाने से पहले और बाद में हाथ धोएं।
  • टॉयलेट के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह से धोएं।
  • किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल करने के बाद हाथ धोएं।
  • हमेशा स्वच्छ और फिल्टर किया हुआ पानी पीएं।
  • उबला हुआ पानी पीना भी सुरक्षित होता है।
  • पानी के स्रोत को स्वच्छ रखें और उसे दूषित होने से बचाएं।
  • ताजे और साफ-सुथरे फल और सब्जियों का सेवन करें।
  • खाना बनाने से पहले सभी खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह से धो लें।
  • मांस और अंडे को अच्छी तरह से पकाएं।

सड़क किनारे के खाने से बचें

बाहर के खाने से बचें, खासकर उन जगहों से जहां स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा जाता।

दूषित खाद्य पदार्थों से बचें

  • बासी और खराब हो चुके खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • यदि आपको किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी है, तो उसका सेवन न करें। जैसे लैक्टोज असहिष्णुता में दूध और दूध उत्पादों से बचें।
  • बच्चों को रोटावायरस संक्रमण से बचाने के लिए रोटावायरस वैक्सीन लगवाएं।
  • साफ कपड़े पहनें और साफ-सुथरे बिस्तर का उपयोग करें।
  • समय-समय पर अपने घर और आसपास की जगह की सफाई करें।
  • यात्रा के दौरान साफ और सुरक्षित पानी और भोजन का सेवन करें।
  • सड़क किनारे के खाने से बचें और बोतलबंद पानी पीएं।
  • प्रोबायोटिक्स सप्लीमेंट्स या खाद्य पदार्थ (जैसे दही) का सेवन करें, जो आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं।
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