जालंधर, ENS: पंजाबी अभिनेता व गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को लेकर मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। दरअसल, ओटीटी प्लेटफार्म पर 2 दिन फिल्म रिलीज होने के बाद बैन कर दी गई। जिसके बाद से लगातार मामले में तूल पकड़ी हुई है। वहीं इस मामले को लेकर शहर की विभिन्न सिख प्रतिनिधि संगठनों ने एडीसी अमनिंदर कौर बराड़ को मांगपत्र सौंपकर फिल्म सतलुज को दोबारा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने सहित 3 प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखीं। संगठनों ने कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके कार्यों पर आधारित फिल्म सतलुज पर बिना स्पष्ट कारण बताए प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे सिख समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
उन्होंने सरकार से फिल्म पर लगाया गया प्रतिबंध हटाकर इसे दोबारा रिलीज करने की मांग की। संयुक्त रूप से मांगपत्र देने वालों में शिरोमणि अकाली दल (पुनर-सुरजीत), इंटरनेशनल पंथक दल, यूनाइटेड अकाली दल, बेगमपुरा खालसा राज पार्टी और पंथक आजाद ग्रुप के प्रतिनिधि शामिल रहे। संगठनों ने कहा कि उन्हें मौजूदा सरकार से उम्मीद है कि वह सिख समुदाय से जुड़े लंबित मामलों में न्याय सुनिश्चित करेगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी।
शिरोमणि अकाली दल (पुनर-सुरजीत) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला ने बताया कि मांगपत्र में पहली मांग बंदी सिंहों की तत्काल रिहाई की गई है। दूसरी मांग फिल्म ‘सतलुज’ पर लगे प्रतिबंध को हटाकर उसे दोबारा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने की है। वहीं तीसरी मांग जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की रखी गई है। गुरप्रताप सिंह वडाला ने कहा कि सरकार को इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों का समाधान हो सके।
