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Jalandhar News: कर्मियों के तबादलों पर यूनियन में मतभेद, जनरल सेक्रेटरी का आया बयान, देखें Live

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जालंधर, ENS: नगर निगम में हेल्थ शाखा के 7 बिल क्लर्कों के तबादले को लेकर कर्मचारी यूनियनों के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी सनी सहोता ने नगर निगम कमिश्नर और मेयर द्वारा किए गए तबादलों के फैसले का समर्थन किया। इसके साथ ही उन्होंने हड़ताल की चेतावनी देने वाली अन्य यूनियनों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे आम कर्मचारियों को अपनी सीटें बचाने के लिए मोहरा बना रही हैं। प्रेस से बात करते हुए सनी सहोता ने कहा कि जालंधर नगर निगम के कमिश्नर और मेयर द्वारा स्वास्थ्य शाखा (हेल्थ ब्रांच) के 7 बिल क्लर्कों का तबादला करना सराहनीय और सख्त कदम है।

उन्होंने कहा कि इन क्लर्कों के खिलाफ कर्मचारियों की लंबे समय से शिकायतें थीं। कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा था। बैंक के फॉर्म भरने से लेकर सैलरी सर्टिफिकेट जारी करने तक के बदले पैसे ऐंठे जा रहे थे। इस तानाशाही को खत्म करने के लिए हम कमिश्नर साहब, मेयर साहब और पंजाब सरकार का धन्यवाद करते हैं।

दूसरी यूनियनों द्वारा बुलाई जा रही हड़ताल पर तीखा हमला बोलते हुए सहोता ने कहा कि जो लोग हड़ताल का नोटिस दे रहे हैं, वे आम कर्मचारियों के हितों के लिए नहीं, बल्कि अपनी पसंदीदा सीटें बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों को सचेत करते हुए कहा कि हर बार की तरह इस बार भी उन्हें ‘पक्की भर्ती नहीं हो रही’ का झूठा बहाना बनाकर गुमराह किया जाएगा और काम बंद करने के लिए उकसाया जाएगा। उन्होंने कहा, “कर्मचारियों को सोचना-समझना चाहिए कि 30-30 साल से जो लोग एक ही सीट पर जमे हुए हैं, सरकार द्वारा सिर्फ उनका फेरबदल (शफलिंग) किया गया है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

जब सनी सोता से यह सवाल किया गया कि जब सभी कर्मचारी एक ही हैं, तो यूनियनों के बीच यह फूट क्यों दिखाई दे रही है? इस पर उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल यूनियनों का आपसी वैचारिक मतभेद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सफाई मदद फेडरेशन साल 2002 से (चंदन ग्रेवाल के नेतृत्व से लेकर आज तक) हमेशा बिना किसी निजी स्वार्थ के सिर्फ कर्मचारियों के हक के लिए समय-समय की सरकारों से टकराती आई है। सोता ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि कोई यह साबित करके दिखाए कि उन्होंने कभी अपने निजी फायदे के लिए कोई काम किया हो; वे खुद पहले एक सफाई सेवक थे और साल 2016 में पदोन्नत होकर सैनिटरी सुपरवाइजर बने, जिसके अलावा उनके पास कोई और अतिरिक्त चार्ज नहीं है, जबकि दूसरी तरफ कई ऐसे लोग हैं जो तीन-तीन, चार-चार चार्ज दबाकर बैठे हैं। उन्होंने साफ तौर पर ऐलान किया कि शहर की कम से कम 12 प्रमुख कर्मचारी यूनियनें उनके इस फैसले के साथ खड़ी हैं और वे इस स्वार्थी व प्रस्तावित हड़ताल का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करते हैं।

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