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Israel के वित्त मंत्री ने Donald Trump को दी चुनौती, बोले – ‘हम नहीं बदलेंगे अपना Stand’

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नई दिल्ली: ईरान के साथ युद्ध खत्म करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिशों के बीच में इजरायल ने साफ संकेत दिया है वह लेबनान से अपनी सेना को हटाने के मूड में नहीं है। इजरायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच का कहना है कि इजरायली सेना आने वाले कई सालों तक दक्षिणी लेबनान में बने सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगी और अमेरिका के दबाव में पीछे नहीं हटेगी।

इजरायल नहीं बदलेगा अपना स्टैंड

एक इंटरव्यू में स्मोट्रिच ने कहा कि इजरायल तब तक अपने स्टैंड नहीं बदलेगा जब तक हिज्बुल्लाई पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ देता है। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका भी इजरायल की रेड लाइन्स को समझता है। उन्हें नहीं लगता है कि वांशिगटन सेना हटाने की कोई औपचारिक मांग करेगा।

स्मोट्रिच ने कहा कि इजरायल सिर्फ अस्थायी चौकियां नहीं बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में स्थायी सैन्य ढांचा और बेस भी विकसित कर सकता हैं। उनके अनुसार, मौजूदा सीमा व्यवस्था इजरायल की सुरक्षा जरुरतों को पूरा नहीं करती और देश को रक्षात्मक रुप से सुरक्षित सीमाएं चाहिए। इजरायली नेता ने जोर देकर कहा कि – जब तक हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ देता है। हम एक मिलीमीटर भी पीछे नहीं हटेंगे। स्मोट्रिच ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री भी उनकी ही सोच रखते हैं।

वहीं ईरान अमेरिका समझौते को लागू करने के लिए स्विटजरलैंड में अहम वार्ता शुरु होने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस भी बातचीत में हिस्सा लेने के लिए स्विटजरलैंड पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों तक दोनों पक्ष युद्धविराम और समझौते के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

होने वाली है अहम बैठक

स्विस विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी स्विटजरलैंड पहुंच चुका है। बर्गेनस्टॉक रिसोर्ट में होने वाली यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

हालांकि बातचीत शुरु होने से पहले ही नए तनाव उभरते दिख रहे हैं। ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का दावा किया है जबकि लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव पूरी तरह खत्म ही नहीं हुआ है। ऐसे में स्विटजरलैंड की वार्ता पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई है क्योंकि इसी बातचीत से तय हुआ है कि पश्चिम एशिया में शांति की राह आगे बढ़ेगी या क्षेत्र में फिर जंग भड़क उठेगी।

 

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