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Hormuz से भी बढ़ गया संकट, Experts ने दी चेतावनी बोले – ‘Taiwan बन सकता है भारत के लिए सिरदर्द’

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नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता फाइनल हो गया है। लंबे समय से दुनिया को डरा रहा होर्मुज स्ट्रेट संकट आखिरकार खत्म हो गया है। दुनिया की 20 फीसदी तेल-गैस जरुरत को पूरा करने के लिए अहम ये समुद्री रास्ता ओपन हो गया है। इससे ईरानी तेल के जहाजों की आवाजाही दिखने लगी है। होर्मुज Crisis वैश्विक तेल बाजार में इतिहास का सबसे बड़ा संकट करार दिया गया है।

होर्मुज खुलने की राहत के बीच ने जनवरी 2016 से अक्टूबर 2017 तक चीन में राजदूत रहे भारत के पूर्व विदेश मंत्री विजय गोखले ने बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इससे भी बड़ा संकट सामने हैं। ताइवान से जुड़ा हुआ है। भले ही 5000 किलोमीटर दूर है लेकिन ये भारत के लिए सिरदर्द बन सकता है।

भारत को रहना पड़ेगा तैयार

यूएस ईरान पीस डील होने के बाद होर्मुज संकट खत्म होता दिख रहा है परंतु भारत को एक और संकट के लिए तैयार रहना होगा जो शायद इससे भी बड़ा हो सकता है। ये अलर्ट दिया है पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने उन्होंने अपनी नई किताब चाइनीज वॉर पर चर्चा के दौरान ये कहा कि उन्होंने कहा कि हम सोचते है कि ताइवान हमारी चिंता का विषय नहीं है क्योंकि यह 5,000 किलोमीटर दूर है। मैं आपको बता दूं कि हम ताइवान के मलक्का स्ट्रेट के संकट के अपने देश पर पड़ने वाले प्रभाव को बहुत कम आंक रहे हैं।

होर्मुज से डरी दुनिया

कुछ महीने पहले तक होर्मुज संकट की संभावना करीबन शून्य लग रही थी। एक्सपर्ट्स भी कह रहे थे कि होर्मुज बंदी का कदम ईऱान नहीं उठा सकता है क्योंकि उसने इतिहास में कभी इसे बंद नहीं किया और वह तेल निर्यात पर अंकुश नहीं लगाएगा। यह उसकी लाइफलाइन है फिर युद्ध बढ़ा शीर्ष ईरानी नेताओं पर हमले हुए तो अचानक ये होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा सप्लाई संकट बताया है।

होर्मुज ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया की बल्कि होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग से यूरोप और अमेरिका भी परेशान हो चुके हैं। गंभीर आर्थिक प्रभावों को देखते हुए हुी अमेरिका ने ईरान के साथ समझौते को प्राथमिकता दी है। यूएस ईरान पीस डील पर शुक्रवार 19 जून को साइन किए जाएंगे।

होर्मुज फिर खुलने के बाद यह सोचना स्वभाविक है कि सबसे बुरा दौर बीत चुका है परंतु भारत की कमजोरियां पश्चिम एशिया तक ही सीमित नहीं है। पूर्व विदेश सचिव गोखले ने कहा कि आप ताइवान की ओर देखें। यदि लगता है कि यह बहुत दूर है और हमें परेशान नहीं होना है तो एक बार फिर सोचें। होर्मुज बंद होने का असर ताइवान स्ट्रेट में संकट पैदा होने पर होने वाले संभावित प्रभावों का एक छोटा सा हिस्सा लगेगा। उन्होंने कहा कि वो युद्ध की बात नहीं कर रहे हैं और यदि ऐसा हुआ तो तीसरा विश्व युद्ध शुरु हो जाएगा क्योंकि इसमें अमेरिका भी शामिल होगा।

ताइवान संकट है होर्मुज से भी बड़ा

होर्मुज फिर खुलने के बाद यह सोचना स्वभाविक हो गया है कि सबसे बुरा दौर बीत गया है परंतु भारत की कमजोरियां पश्चिम एशिया तक ही सीमित नहीं हैं। पूर्व विदेश सचिव गोखले ने कहा कि आप ताइवान की ओर देखें यदि लगता है कि यह बहुत दूर है और हमें परेशान नहीं होना है। एक बार फिर सोचे होर्मुज बंद होने का असर ताइवान स्ट्रेट में संकट पैदा होने पर होने वाले संभावित प्रभावों का एक छोटा सा हिस्सा लगेगा। उन्होंने कहा कि वे युद्ध की बात नहीं कर रहे हैं यदि ऐसा हुआ तो तीसरा विश्व युद्ध शुरु हो जाएगा क्योंकि इसमें अमेरिका भी शामिल होगा।

आईटी सेवाओं पर बुरा असर

विजय गोखले ने कहा कि ताइवान संकट भारत के आईटी उद्योग को बर्बाद कर सकता है। भारत से सिलिकॉन वैली तक जाने वाले 15 पनडुब्बी केबल ताइवान में लंगर डाले हैं और पिछले दो सालों में चीन में तीन केबल काटे हैं। उन्होंने कहा कि – हमें यह नहीं सोचना कि ताइवान दूर है या यदि चीन हमला करता है तो यह हमारी समस्या नहीं है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी समस्या है।

क्यों ताइवान संकट की चर्चा?

ताइवान Crisis की चच्रा के पीछे ड्रैगन है। चीन कई सालों से ताइवान पर कंट्रोल करना चाहता है। 2023 में CIA पूर्व डायरेक्टर विलियम बर्न्स ने यह कहा था कि शी जिनपिंग ने पीएलए को 2027 तक ताइवान पर सफल आक्रमण के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया था और ऐसा हुआ तो ताइवान संकट खड़ा हो जाएगा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरुरत पड़ने पर वह बल इस्तेमाल करके भी उसका एकीकरण करने की बात कहता रहा है।

 

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