नई दिल्ली: मध्य पूर्व में महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों ने युद्ध खत्म करने पर सहमति जताई है। जल्द ही स्विटजरलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। यदि यह समझौता लागू होता है और होर्मुज जलडमरुमध्य फिर से पूरी तरह खुल जाता है। भारत को आर्थिक, रणनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर बड़े फायदे मिल सकते हैं।
आखिर क्यों भारत के लिए खास है होर्मुज?
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी जरुरत का करीब 90 फीसदी तेल और गैस आयात करता है। कच्चे तेल के आयात का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। इनमें से लगभग आधा तेल होर्मुज जलडमरुमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में शांति भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पेट्रोल डीजल के घटेंगे दाम
होर्मुज में आवाजाही सामान्य होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे देश की पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है।
तेल सस्ता होने से अर्थव्यवस्था को होगा फायदा
भारतीय तेल सस्ता होने से आयात बिल कम होगा और महंगाई पर दबाव घटेगा जिससे अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरानी तेल में सल्फर की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है इसलिए यह कई मामलों में अन्य खाड़ी देशों के तेल से बेहतर माना जाता है।
खाड़ी देशों में काम कर रहे करीब एक करोड़ भारतीयों को सुरक्षा और रोजगार के लिहाज से राहत मिलेगी।
विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से आने भारतीयों से आने वाले पैसा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम है। हालात सामान्य होने से यह प्रवाह प्रभावित नहीं होगा।
होर्मुज क्षेत्र में फंसे जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा समुद्री व्यापार सामान्य होगा।
भारत ने ईरान के चाबहार और बंदर अब्बास बंदरगाहों में बड़ा निवेश किया है। युद्ध के कारण रुकी परियोजनाओं को फिर से गति मिल सकती है।
होर्मुज पर संभावित टोल और नियंत्रण को लेकर बनी अस्थिरता कम हो सकती है। इससे भारत का व्यापार आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत नहीं चाहता है कि मध्य पूर्व में चीन और पाकिस्तान का प्रभाव बढ़े। क्षेत्र में स्थिरता भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकती है।
भारत को मिलेगा लाभ
समझौते की पूरी शर्तें अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। यमन, लेबनान, इजरायल, परमाणु कार्यक्रम और 300 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज जैसे कई मुद्दों पर अभी स्पष्टता बाकी है। इसके बावजूद यदि यह समझौता सफलतापर्वक लागू होता है। भारत का तेल, व्यापार, निवेश, सुरक्षा और रणनीतिक हितों के स्तर पर बड़ा लाभ मिल सकता है।
