नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए आज एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकता है। इस समझौते के साथ ही फरवरी के आखिर से जारी उस जंग को खत्म होने की उम्मीदें फिर से तेज हो गई हैं। इसके चलते वैश्विक तेल आपूर्ति को नुकसान पहुंचा है। पूरी दुनिया के सामने एक नई चुनौती पैदा हो गई है।
इन दो देशों के बीच मे सीजफायर कर रहे पाकिस्तान का कहना है कि शमझौते का मसौदा पूरी तरह से तैयार है। ट्रंप ने कहा कि समझौते के तुरंत बाद रणनीतिक रुप से महत्वपूर्ण जलमार्ग Straight Of Hormuz को सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों और तेल टैंकरों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। अब सवाल आता है कि यदि वाकई में समझौते के बाद होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह से खोल दिया जाता है तो इससे किन-किन देशों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
इन देशों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
चीन होर्मुज के खुलने से सबसे बड़ा फायदा चीन को होगा क्योंकि इस जलमार्ग से गुजरने वाले कुल तेल का 37.7% अकेला चीन आयात करता है। इसके बंद होने से चीन में कारोबार से लेकर आम जिंदगी पर भारी असर पड़ा है।
भारत अपनी जरुरत का लगभग 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से मांगता है। होर्मुज के खेलने से भारत का तेल के आयात पर बिल कम हो जाएगा। माल ढुलाई के खर्च में कमी और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
दक्षिण कोरिया कुल तेल का 12% और जापान 10.9% हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से मांगता है। होर्मुज के खुलने से इनके लिए भी ऊर्जा संकट पूरी तरह से टल जाएगा।
फायदा में रहने वाला निर्यातक देश
होर्मुज के रास्ते में कुल तेल निर्यात में सऊदी अरब की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 37.2% है। इसके खुलने से बिना किसी रुकावट के सऊदी एशियाई देशों में अपने खरीदारों को तेल भेज सकेगा। तेल के कुल निर्यात में इराक 22.8% और संयुक्त अरब अमीरात 12.9% का योगदान रखता है। समुद्री नाकेबंदी हटने से इनका फंसा हुआ बिजनेस भी दोबारा से चालू हो जाएगा।
तेल के कुल निर्यात में इराक 22.8% और संयुक्त अरब अमीरात 12.9% का योगदान रखता है। समुद्री नाकेबंदी हटने से इनका फंसा हुआ बिजनेस भी दोबारा से चालू हो जाएगा।
कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG और हीलियम का सप्लायर है। दुनिया का 20% एलपीजी कतर से इसी रास्ते से होकर आता है।
कुवैत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से होर्मुज पर ही टिकी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच अगर शांति समझौते पर मुहर लगती है तो ईरान पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटेंगे। जिससे वह अपने बंदरगाहों से आधिकारिक रुप से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ज्यादा का तेल बच पाएगा। इससे उसकी इकोनॉमी बूस्ट मिलेगा।
वैश्विक बाजारों को राहत
होर्मुज से होकर अगर वापिस से तेल और गैस की सप्लाई सुचारु रुप से होने लगे है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे गिरेंगे। इसके अलावा समुद्री जहाजों का बीमा प्रीमियर भी सस्ता होगा जिससे दुनियाभर में महंगाई कम होने में मदद मिलेगी।
