टेक्नोलॉजी: डिजिटल दुनिया में साइबर अटैक सिर्फ एक कंप्यूटर या फिर अकाउंट तक ही सीमित नहीं है। एक यूजर की पहचान से शुरु हुआ फ्रॉड अब कई सिस्टम, ऐप्स, क्लाउड नेटवर्क और दूसरी जुड़ी सेवाओं तक पहुंच सकता है। ऐसे में बदलते हुए साइबर खतरे की तस्वीर माइक्रोसॉफ्ट की नई डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट 2026 में सामने आ चुकी है। रिपोर्ट्स की मानें तो 2026 की शुरुआत में 6 महीने में साइबर हमलों से प्रभावित हो चुके यूजर्स के मामले में अब भारत 7वें नंबर पर पहुंच चुका है। माइक्रोसॉफ्ट ने इस रिपोर्ट के लिए अब हर दिन 165 ट्रिलियन से भी ज्यादा सिक्योरिटी सिग्नल्स की डिटेल ली है।
बड़े साइबर फ्रॉड के मामले
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, आज के समय में साइबर हमले किसी एक जगह पर रुकने की जगह कई जुड़े हुए सिस्टम तक पहुंच चुके हैं। इसमें यूजर अकाउंट बिजनेस ऐप्स, मल्टी क्लाउड प्लेटफॉर्म, थर्ड पार्टी सप्लायर्स और जरुरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल हो चुके हैं। ऐसे सिस्टम में मिली हुई एंट्री अब आगे नेटवर्क के लिए रास्ता बना रही है।
एआई हमले के कारण बढ़ी मुश्किलें
रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई को भी साइबर सिक्योरिटी में हो रहे बदलावों का हिस्सा बताया गया है। एआई का इस्तेमाल साइबर हमलावरों के साथ-साथ सिक्योरिटी टीमों के अंतर्गत भी किया जा रहा है। इससे काम को अब तेजी के साथ पूरा करने, जानकारी निकालने और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, एआई साइबर हमलों की स्पीड बढ़ गई और बड़े स्तर पर उनको चलाने की क्षमता बढ़ रही है।
एक अकाउंट से बढ़ जाएगा खतरा
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, जिन मामलों में अब वैध यूजर अकाउंट के जरिए सेंध लगी है उसमें 52.2 प्रतिशत मामलों में आगे चलकर क्रेडेंशियल चोरी भी हुई है। इसका अर्थ है कि एक अकाउंट के साथ छेड़छाड़ होने के बाद अब दूसरे अकाउंट्स तक पहुंच बनाने की कोशिश भी हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बोला गया है कि किसी सॉफ्टवेयर की कमजोरी पब्लिक होने और उसका असली हमले का इस्तेमाल होने के बीच में समय कई मामलों में 24 घंटे से भी कम का रह चुका है। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि अब साइबर सुरक्षा में सिर्फ बाहरी हमलों का रोकना ही काफी नहीं होगा बल्कि संगठनों को इस तरह के हमलों के बाद भी काम जारी रखना और जल्दी संभालने की क्षमता पर ध्यान देना पड़ेगा।
