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राज्यपाल ने विकसित भारत-2047 के निर्माण के लिए बौद्ध मूल्यों और आधुनिक विज्ञान पर दिया बल

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युवाओं से नालंदा परंपरा के मूल्यों का अनुसरण करने का आह्वान किया

शिमलाः राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व हिंसा, असहिष्णुता, युद्ध, पर्यावरण संकट तथा नैतिक मूल्यों में कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में भगवान बुद्ध की करुणा, मध्यम मार्ग, अहिंसा और आत्म ज्ञान पर आधारित शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। उन्होंने धम्मपद के शाश्वत संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि घृणा का अंत कभी घृणा से नहीं किया जा सकता, बल्कि केवल प्रेम और करुणा से इसे समाप्त किया जा सकता है और यही शाश्वत सत्य है। राज्यपाल ने आज बैजनाथ के ताशीजोंग में ‘फ्रॉम नालंदा टू हिमालयास्-दि अन ब्रोकन लिगेसी ऑफ द बुद्धिस्ट नॉलेज ट्रेडिशन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया।

इस अवसर पर गुप्ता ने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं था, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए ज्ञान का एक प्रकाश-स्तंभ था, जहां दर्शन, तर्कशास्त्र, चिकित्सा, व्याकरण, गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों पर उच्च स्तरीय शोध कार्य किए जाते थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ नालंदा का भौतिक स्वरूप भले ही नष्ट हो गया हो, लेकिन हिमालय में स्थित मठों, विहारों तथा बौद्ध संस्थानों ने भारतीय भाषाओं, संस्कृति, कला और अमूल्य पांडुलिपियों का संरक्षण कर इस महान विरासत को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। भारतीय हिमालय वास्तव में नालंदा की जीवंत विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं।


राज्यपाल ने परिषद द्वारा मठों में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के पाठ्यक्रम को लागू करने की अनुपम पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम पारंपरिक मठ शिक्षा और आधुनिक शिक्षा पद्धति के बीच एक सार्थक सेतु का कार्य करेगा, जिससे युवा भिक्षु एवं भिक्षुणियां अपनी आध्यात्मिक साधना को बनाए रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक योग्यताएं अर्जित कर सकेंगे।

परम पावन धर्मगुरू दलाई लामा के मार्गदर्शन में स्थापित परिषद के पदाधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने देश के युवाओं से नालंदा परम्परा के मूल आदर्शों जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, अनुशासन, करुणा और मानव सेवा से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इंडियन हिमालयन नालंदा बुद्धिस्ट ट्रेडिशन काउंसिल द्वारा खाम्पागर मठ, ताशीजोंग के सहयोग से किया गया है। संगोष्ठी में मठ शिक्षा के आधुनिकीकरण तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान में बौद्ध दर्शन की प्रासंगिकता पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर धर्म एवं संस्कृति मंत्री, सीटीए, धर्मशाला त्सेग्याल चुक्या द्रान्यी, खाम्पागर मठ के आध्यात्मिक प्रमुख खामत्रुल रिनपोछे, खेनपो छोयिंग लुंदुप, पालपुंग शेराबलिंग मठ से खेनपो पेमा नेगी, बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल, एनआईओएस के निदेशक डॉ. राजीव कुमार सिंह, कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कांगड़ा कुलभूषण वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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