नई दिल्ली, 5 जून: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब सरकार के निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को नियंत्रित करने संबंधी फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है जिसने निजी स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाया है।
एक वीडियो संदेश में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार जल्द ही एक नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत कोई भी निजी स्कूल एक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस सीमा में ट्यूशन फीस, लाइब्रेरी फीस, डेवलपमेंट फीस और अन्य सभी प्रकार के शुल्क शामिल होंगे।
तीन साल में अधिक फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को लौटानी होगी राशि
केजरीवाल ने प्रस्तावित कानून की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने वाले निजी स्कूलों को अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल ने पिछले तीन वर्षों में कुल 50 प्रतिशत फीस बढ़ाई है, तो उसे निर्धारित सीमा से अधिक वसूली गई राशि लौटानी होगी। उन्होंने इसे अभिभावकों को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
केजरीवाल ने कहा कि इससे पहले दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि को वापस करवाया था और अब पंजाब में भी इसी मॉडल को लागू किया जा रहा है।
शिक्षा क्षेत्र में पंजाब को बताया अग्रणी
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब ने उल्लेखनीय प्रगति की है और छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके परिवारों को भी राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है।
AAP प्रमुख ने कहा कि सभी निजी स्कूल एक जैसे नहीं हैं, लेकिन कुछ संस्थानों द्वारा अत्यधिक फीस वृद्धि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाती है। ऐसे मामलों को नियंत्रित करना आवश्यक है ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ बनी रहे।
पूरे देश में लागू हो ऐसा मॉडल
केजरीवाल ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि का मुद्दा केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के अभिभावक इससे प्रभावित होते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा उठाया गया कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। उनका मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इसी तरह के कानून पूरे देश में लागू किए जाने चाहिए, ताकि अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था के हित में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो शिक्षा को अधिक जवाबदेह और जनहितकारी बनाने की दिशा में मदद करेगा।
