नई दिल्लीः दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। अरविंद केजरीवाल द्वारा कोर्ट में नए हलफनामे अपनी उस याचिका को मजबूत करने के लिए दायर किया है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए। इस नए हलफनामे में केजरीवाल ने यह बात उठाई है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं। उन्हें केस सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा सौंपे जाते हैं। तुषार मेहता ही आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तरफ से वकील के तौर पर पेश हो रहे हैं।
हलफनामे में कहा गया है कि इससे ‘हितों के टकराव का सीधा और गंभीर अंदेशा’ पैदा होता है। केजरीवाल ने कहा, ‘मैं यह कहता हूं कि मौजूदा मामले में, भारत के सम्मानित सॉलिसिटर जनरल इस माननीय अदालत के सामने केंद्रीय जांच ब्यूरो की तरफ से पेश हो रहे हैं। वे मेरी खुद को अलग करने की याचिका का विरोध कर रहे हैं, और मेरे पक्ष में दिए गए बरी करने के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर बहस कर रहे हैं। मैं विनम्रतापूर्वक कहता हूं कि इससे हितों के टकराव का सीधा और गंभीर अंदेशा पैदा होता है।
वही विधि अधिकारी और कानूनी तंत्र, जो इस माननीय अदालत के सामने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहा है, उसी संस्थागत व्यवस्था का भी हिस्सा है जिसके तहत केंद्र सरकार के केस और सरकारी काम, इस मामले की सुनवाई कर रही माननीय न्यायाधीश के करीबी परिवार के सदस्यों को सौंपे जाते हैं।’ केजरीवाल ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया है। इन दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2023-2025 के दौरान न्यायाधीश के बेटे को काफी मात्रा में कानूनी काम सौंपा गया था। उनका कहना है कि इन तथ्यों को सॉलिसिटर जनरल द्वारा सुनवाई की पहली तारीख पर ही सामने लाया जाना चाहिए था, न कि इन्हें कानूनी पत्रकारों या सोशल मीडिया के भरोसे छोड़ देना चाहिए था।
