नई दिल्ली/चंडीगढ़, 16 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) के श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मलविंदर सिंह कंग ने संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का स्पष्ट और मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द लागू किया जाए।
संसद में बोलते हुए कंग ने कहा कि आम आदमी पार्टी और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान महिलाओं के सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देना केवल एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक आवश्यक पहल है।
महिला सम्मान की परंपरा और कानून लागू करने की मांग
मलविंदर कंग ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की भावना भारतीय संस्कृति, विशेष रूप से सिख परंपरा में गहराई से निहित है। उन्होंने याद दिलाया कि जिस समय देश में सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं प्रचलित थीं, उस समय गुरु रामदास जी और गुरु अर्जन देव जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और महिलाओं को सम्मानजनक स्थान दिलाने की दिशा में कार्य किया।
उन्होंने यह भी कहा कि जब कई विकसित देशों में महिलाओं को मतदान का अधिकार भी प्राप्त नहीं था, तब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने वर्ष 1920 में ही महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया था, जो पंजाब की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।
कंग ने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण कानून को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक सशक्तिकरण मिल सके।
परिसीमन पर केंद्र को घेरा, संघीय ढांचे पर सवाल
महिला आरक्षण के समर्थन के साथ-साथ कंग ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परिसीमन के नाम पर छोटे राज्यों, विशेषकर पंजाब, की राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने की साजिश रची जा रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब, जिसकी आबादी देश की कुल आबादी का केवल लगभग 2 प्रतिशत है, ने स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अधिक बलिदान दिए हैं। इसके बावजूद राज्य को बार-बार राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले पंजाब को अपनी राजधानी चंडीगढ़ के मुद्दे पर नुकसान उठाना पड़ा और अब संसाधनों से जुड़े संस्थानों, जैसे भाखड़ा बांध, में भी उसकी हिस्सेदारी कम की जा रही है।
कंग ने कहा कि यह प्रवृत्ति देश के संघीय ढांचे के लिए खतरा है, जिसमें सभी राज्यों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
जनसंख्या नियंत्रण का उल्टा असर, पंजाब को नुकसान
मलविंदर कंग ने कहा कि भारत एक संघीय ढांचे वाला देश है, जहां राज्यों का संतुलित प्रतिनिधित्व जरूरी है। उन्होंने बताया कि जब केंद्र सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण की अपील की थी, तब पंजाब ने इसे पूरी जिम्मेदारी के साथ लागू किया।
लेकिन अब वही जनसंख्या नियंत्रण पंजाब के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है, क्योंकि कम जनसंख्या वृद्धि के आधार पर राज्य की लोकसभा और विधानसभा सीटों में कटौती की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो इससे बड़े राज्यों को अनुचित लाभ मिलेगा और छोटे राज्यों की आवाज कमजोर हो जाएगी।
सत्ता के दुरुपयोग की आशंका
कंग ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने बहुमत का इस्तेमाल कर परिसीमन प्रक्रिया को अपने राजनीतिक हितों के अनुसार प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के खिलाफ होगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम न केवल राज्यों के अधिकारों को कमजोर करेंगे, बल्कि देश के संघीय संतुलन को भी प्रभावित करेंगे।
अपने संबोधन के अंत में मलविंदर कंग ने कहा कि महिला आरक्षण कानून को लागू करना समय की मांग है और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि परिसीमन के नाम पर राज्यों के अधिकारों से समझौता न किया जाए।
उन्होंने केंद्र से अपील की कि वह संघीय ढांचे का सम्मान करे और छोटे राज्यों के हितों की रक्षा करते हुए संतुलित और पारदर्शी तरीके से निर्णय ले।
कंग ने कहा कि देश की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब एक ओर महिलाओं को सशक्त बनाया जाए और दूसरी ओर राज्यों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जाए।
