चंडीगढ़, 14 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में नियुक्तियों से जुड़े नियमों में केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव का कड़ा विरोध किया है। पार्टी नेताओं ने इसे पंजाब के संवैधानिक अधिकारों, जल संसाधनों और संघीय ढांचे पर सीधा हमला बताया है।
AAP नेताओं का कहना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत केंद्र सरकार धीरे-धीरे राज्यों के अधिकारों को कमजोर कर रही है और महत्वपूर्ण संस्थानों पर अपना नियंत्रण बढ़ा रही है।
संघीय ढांचे पर हमला, अंबेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ फैसला
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह देश के संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह फैसला भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के दिन लिया गया, जिन्होंने राज्यों को अधिकार देने वाले मजबूत संघीय ढांचे की परिकल्पना की थी।
बैंस ने कहा कि BBMB पंजाब के जल प्रबंधन से सीधे जुड़ा हुआ है और इसमें पंजाबी अधिकारियों की अनिवार्यता खत्म करने से राज्य के हितों को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि बाहरी अधिकारियों की नियुक्ति से स्थानीय परिस्थितियों की समझ की कमी के कारण फैसलों में असंतुलन आ सकता है।
जल संसाधनों और बांधों पर नियंत्रण को लेकर गंभीर चिंता
कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि 1974 में BBMB के गठन के बाद से एक स्पष्ट और संतुलित व्यवस्था थी, जिसमें पावर सदस्य पंजाब से और सिंचाई सदस्य हरियाणा से होता था। इस व्यवस्था पर कभी कोई विवाद नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अब नियमों में बदलाव कर “प्राथमिकता” जैसे शब्द जोड़कर नियुक्तियों को खुला कर दिया है, जिससे अपनी पसंद के लोगों को नियुक्त करने का रास्ता साफ हो गया है। गोयल ने कहा कि पंजाब ने पहले ही BBMB में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का विरोध किया था, क्योंकि इससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, लेकिन केंद्र ने राज्य की आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि बांधों पर CISF की तैनाती से भी पंजाब पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है, जबकि पहले पंजाब पुलिस लंबे समय से सुरक्षा का काम प्रभावी ढंग से कर रही थी।
AAP का आरोप—पंजाब के पानी और संस्थानों पर कब्जे की कोशिश
AAP के पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि BBMB नियमों में किया गया बदलाव पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह पंजाब के संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि पहले जो महत्वपूर्ण पद पंजाब के अधिकार में थे, अब उन्हें खुला कर दिया गया है, जिससे देशभर से किसी को भी नियुक्त किया जा सकता है। पन्नू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल पानी ही नहीं, बल्कि पंजाब यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ जैसे अन्य मुद्दों पर भी नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ बीजेपी पंजाब में सरकार बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ वह लगातार राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले फैसले ले रही है।
AAP नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी और पंजाब के लोग किसी भी कीमत पर राज्य के अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो इसका राजनीतिक, कानूनी और जन स्तर पर कड़ा विरोध किया जाएगा। AAP ने दोहराया कि वह पंजाब के जल, संसाधनों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की “लूट” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
