नई दिल्ली: ईरान के सीनियर अधिकारों ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ हाल की लड़ाई को अपने 47 साल के इतिहास में पहली सैन्य जीत मानता है। उन्होंने कहा कि इस नतीजे ने अमेरिका के साथ शांति बातचीत में ईरान की स्थिति को बदल दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक तरह की परीक्षा भी पेश की हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुज्बता खामेनेई के सैन्य सलाहाकर मोहसेन रेजाई ने सीएनएन से
सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मुज्बता खामेनेई के सैन्य सलाहाकर मोहसेन रेजाई ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि यह पहली बार है जब ईरान ने लड़ाई में जीत हासिल की है। वहीं इससे पहले यह हमेशा से ही हारता रहा है। मोहसेन रेजाई के कहना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिलहाल रुकी हुई है और एक कमजोर सीजफायर के कारण हालात तनावपूर्ण हो गया है।
ट्रंप के हाथ में है अब फैसला
उन्होने यह भी बताया कि अंतिम शांति समझौता अमेरिकी सरकार द्वारा ईरान के फ्रीज फंड में 24 अरब डॉलर जारी करने पर निर्भर है। ईरान चाहता है कि अंतरिम समझौते के बाद पहले चरण में 12 अरब डॉलर और दूसरे चरण में 12 अऱब डॉलर जारी किए जाएं। रेजाई का कहना है कि इस पैसे का जारी करना यह साबित करेगा कि अमेरिका समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अब फैसला ट्रंप के हाथ में है। रेजाई ने यह भी कहा कि यदि अमेरिका के साथ फिर से युद्ध होता है तो ईरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा और संघर्ष और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध का असर फारस की खाड़ी से लेकर लाल सागर और भूमध्य सागर तक फैल सकता है हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध की संभावना कम है।
मोज्तबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात
रेजाई ने यह साफ कर दिया है कि मुज्बता खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई सीधी मुलाकात नहीं होगी। साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ओमान के साथ मिलकर प्रबंधन करने की भी बात कही है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिका पहले भी समझौतों से पीछे हट चुका है इसलिए भविष्य की किसी न्यूक्लियर डील पर भरोसा करना आसान नहीं है।
