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प्रदेश के 13 जिलों में राज्यस्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल का किया आयोजन

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चंडीगढ़- आगामी मानसून सीजन के मद्देनजर आपदा तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए आज प्रदेश के 13 बाढ़ संभावित जिलों में एक साथ पहली राज्य स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 और 2025 की बाढ़ से मिले अनुभवों के आधार पर हरियाणा के आपदा प्रबंधन ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना था।

हरियाणा की वित्त आयुक्त (राजस्व) एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने ‘स्टेट इंसिडेंट कमांडर’ के रूप में राज्य नियंत्रण कक्ष से पूरे अभ्यास का नेतृत्व और संचालन किया।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस अभ्यास का आयोजन राज्य की आपदा तैयारियों का मूल्यांकन करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में सुधार करने, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की पुष्टि करने और कमियों की पहचान करने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार एक सक्रिय, तकनीक-संचालित और समुदाय-केंद्रित आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ड्रिल तीन चरणों में हुई।

इन जिलों में हुआ अभ्यास

यह मॉक ड्रिल गुरुग्राम, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, पलवल, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर में आयोजित की गई। इन जिलों की पहचान उच्च बाढ़ जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में की गई है। वास्तविक बाढ़ जैसी स्थितियों के तहत प्रतिक्रिया तंत्र का परीक्षण करने के लिए प्रत्येक जिले में दो अलग-अलग सिमुलेशन साइट (अभ्यास स्थल) बनाए गए थे।

काल्पनिक परिदृश्य और विभागों की सक्रियता

उन्होंने बताया कि ड्रिल के दौरान भारी मानसून वर्षा और यमुना, घग्गर, टांगरी और मारकंडा जैसी प्रमुख नदियों में जल स्तर बढ़ने के कारण बाढ़, शहरी जलभराव और संचार प्रणालियों के बाधित होने जैसी काल्पनिक स्थितियां बनाई गईं। राज्य ने अपने संपूर्ण आपातकालीन तंत्र को सक्रिय किया, जिसमें गृह, पुलिस, सिंचाई, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, परिवहन, शहरी स्थानीय निकाय और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी सहित 24 विभागों ने हिस्सा लिया। सभी उपायुक्तों ने ‘जिला उत्तरदायी अधिकारियों’ के रूप में कार्य किया।

बचाव और राहत अभियान

उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य और अग्निशमन सेवाओं की टीमों ने खोज एवं बचाव, निकासी ड्रिल, राहत शिविर प्रबंधन और चिकित्सा सहायता का अभ्यास किया। विशेष रूप से नदी तटों के पास फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रियाओं का परीक्षण किया गया ताकि अधिकारी किसी भी चरम स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें।

विशेषज्ञों की निगरानी और सामुदायिक भागीदारी

एनडीएमए के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर रविंदर गुरुंग (रिटायर्ड) ने राज्य मुख्यालय से अभ्यास की निगरानी की। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लेकर बाढ़ प्रबंधन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इस ड्रिल में ‘आपदा मित्र’ स्वयंसेवकों, रेडक्रॉस, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र और स्थानीय एनजीओ ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

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