चंडीगढ़ः पासपोर्ट दफ्तर को धमकी भरा ईमेल मिली है जिसमें तमिलनाडु में पुलिस अधिकारियों को दी गई सजा के बारे में जिक्र किया गया है। ईमेल में परिसर को उड़ाने की बात कही गई है। ईमेल को ‘तमिल लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा भेजा गया है जिसका मेल में ही जिक्र है।

ईमेल में उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश के अबू सईद मामले से लेकर तमिलनाडु के साथनकुलम में बेनिक्स और जयराज मामले तक, और यहां तक कि तमिलनाडु के हालिया अजितकुमार कस्टोडियल मामले में भी, जिन पुलिसकर्मियों को सजा दी गई, वे असल में बेकसूर थे। उन्होंने लिखा कि असली दोषी वे राजनीतिक आका और पुलिस प्रमुख हैं, जो तमिलनाडु के मंत्रियों के इशारे पर निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर दबाव डालते हैं कि वे इस तरह की हिरासत में यातनाएं दें या गैर-कानूनी आदेशों का पालन करें।
उन्होंने कहा कि पासपोर्ट/डाकघरों में हुआ धमाका चेन्नई में पुलिस सुधार लाने के लिए एक सबक बनेगा। विशेष रूप से 1979 की नैनार दास पुलिस कांस्टेबल यूनियन की सिफारिशों को पूरे भारत में और खासकर तमिलनाडु पुलिस बल में लागू करने के लिए। यदि पुलिस कांस्टेबलों के लिए कोई यूनियन काम करे- जोकि पुलिस बल का सबसे निचला तबका हैं- तो उनके पास ऐसे गैर-कानूनी आदेशों को मानने से इनकार करने का अधिकार होगा।
उन्होंने लिखा कि हम, ‘तमिल लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन’, साधनकुलम मामले में कांस्टेबलों से लेकर इंस्पेक्टरों तक के पुलिसकर्मियों को दी गई दोहरी मौत की सजा की कड़ी निंदा करते हैं; और इसके साथ ही, हम विभाग के असली दोषियों-यानी सबसे वरिष्ठ IPS अधिकारियों और राजनीतिक कचरे के खिलाफ युद्ध की घोषणा करते हैं। वहीं इस ईमेल से परिसर में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए पूरे कार्यालय को खाली करवाकर जांच शुरू कर दी है।
