नई दिल्ली: भारत में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन में पाकिस्तान हिस्सा लेगा या नहीं इस बात को लेकर अभी थोड़ी कंफ्यूजन है। पाकिस्तान का यह कहना है कि वो इस महीने के अंतर में सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम में हिस्सा लेने के बारे में संबंधित संस्थानों से बातचीत करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने शुक्रवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की पुष्टि की है। पाकिस्तान को भारत में 20-22 नवंबर को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल होने का नियंत्रण मिला है। उन्होंने कहा कि कई संस्थानों के साथ बातचीत के बाद देश का नेतृत्व इसमें भाग लेने के बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा।
इस्लामाबाद को भी दिया गया है न्योता
भारत ने SCO के सभी सदस्य देशों को भी उस कार्यक्रम में आमंत्रित किया है जिसको संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर आयोजित कर रहे हैं। इस्लामाबाद को भेजा यह नियंत्रण काफी जरुरी है क्योंकि पिछले साल मई में दोनों देशों के बीच में हुए सैन्य टकराव के बाद यह पहली बार होगा कि जब नई दिल्ली ने पाकिस्तान के किसी सीनियर मंत्री को भारत में होने वाले किसी कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया है।
SCO में शामिल होंगे ये देश
यह बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को इस बैठक में शामिल होने का न्यौता मिला है। भारत ने 28 अक्टूबर को यह घोषणा की थी कि स्थापित परंपरा के अनुसार, सभी SCO सदस्यों को निमंत्रण भेजा गया है। SCO यूरेशिया का एक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी अंतर सरकारी समूह है इसमें भारत, चीन, रुस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान और बेलारुस शामिल हैं।
भारत और पाकिस्तान में नहीं है अच्छे रिश्ते
पाकिस्तान को SCO बैठक के लिए निमंत्रण ऐसे समय में मिला है जब दोनों देशों के बीच में रिश्ते काफी तनावपूर्ण है। यह तनाव 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद और भी बढ़ गया है। इस हमले में 26 भारतीय नागरिक मारे गए थे। ऐसे में इसका जवाब देने के लिए भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरु किया था। इस ऑपरेशन का लक्ष्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था।
भारत पाकिस्तान के बीच में सैन्य टकराव चार दिनों तक चला था। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बनी सहमति के बाद 10 मई को खत्म हो गया है। भारत ने SCO को लगातार सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया है। भारत का यह मानना है कि इस समूह को बिना किसी दोहरे मापदंड़ के आतंकवाद और उससे मिलने वाली फंडिंग के खिलाफ एकजुट होकर काम करना चाहिए।
