प्रयागराजः यूपी के प्रयागराज में मनसैता गांव का ग्राम प्रधान जानकीनाथ यादव आखिरकार एक सप्ताह बाद वृंदावन में संत प्रेमानंद के आश्रम में मिला। परिवार ने आरोप लगाए थे कि उसकी हत्या हो गई है। वह 29 अक्तूबर की शाम लुंगी- बनियान में संदिग्ध हालात में लापता हो गया था। परिजनों ने अज्ञात के खिलाफ अपहरण और हत्या का आरोप लगाते एफआईआर दर्ज करवाई थी।
हालांकि, नया सिम एक्टिवेट होने के बाद लापता ग्राम प्रधान का पता चला। खुद ग्राम प्रधान ने पुलिस को फोन करके अपनी जानकारी दी। पुलिस टीम ने वृंदावन पहुंचकर ग्राम प्रधान को सकुशल बरामद किया। उसने परिजनों से कहासुनी के बाद नाराज होकर मोबाइल स्विच ऑफ कर वृंदावन जाने की बात कुबूल की है।
डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार ने पुलिस लाइन में मामले का खुलासा करते बताया कि हाईकोर्ट में कार्यरत समीक्षा अधिकारी छत्रपाल यादव ने थरवई थाने में 30 अक्तूबर को छोटे भाई 29 वर्षीय ग्राम प्रधान जानकीनाथ यादव की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। फिर 3 नवंबर को अज्ञात के खिलाफ अपहरण कर हत्या की आशंका व्यक्त करते मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। ड्रोन व डॉग स्क्वायड की मदद ली और एसडीआरएफ की मदद से मनसैता नदी में भी खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
प्रधान की तलाश के लिए पुलिस की 13 टीमें लगाई गईं। इधर, चार नवंबर की रात जानकीनाथ ने नया सिम खरीदकर अपने चाचा और थरवई थाना प्रभारी को फोन कर वृंदावन में संत प्रेमानंद के आश्रम में होने की जानकारी दी। थरवई पुलिस ने गुरुवार को वृंदावन से ग्राम प्रधान को लाकर परिजनों को सौंप दिया। मामले में पुलिस ने जांच की। पता चला की ग्राम प्रधान का परिवार से झगड़ा हुआ था।
पुलिस की पूछताछ में ग्राम प्रधान जानकीनाथ ने बताया कि परिजनों से कहासुनी से नाराज होकर 29 अक्तूबर की शाम मोबाइल स्विच ऑफ कर घर से पैदल कछार के रास्ते फाफामऊ पहुंचा। जहां नए कपड़े खरीदकर पहने और फाफामऊ रेलवे स्टेशन से 30 अक्तूबर की सुबह करीब छह बजे गंगा गोमती एक्सप्रेस से लखनऊ और फिर लखनऊ जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर चार से सुबह साढ़े दस बजे जनरल टिकट लेकर आगरा पहुंचा। आगरा से झेलम एक्सप्रेस पकड़कर वह मथुरा गया और फिर वृंदावन में संत प्रेमानंद के आश्रम में जाकर रुक गया।
