वॉशिंगटनः अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच शांति वार्ता को लेकर नया विवाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत शुरू करने के लिए पत्र भेजे जाने की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से ईरान को भेजा पत्र शांति वार्ता के लिए नहीं, बल्कि दवाओं की आपूर्ति से संबंधित था। हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वेंस ने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की कि दोनों देशों के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता निकल सकता है या नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक वेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर रेजाई को पत्र भेजा था। हालांकि, ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति को ईरान के साथ शांति वार्ता शुरू करने के लिए कहा था। उनका कहना है कि ईरान को चिकित्सा सहायता और दवाओं की जरूरत है, इसलिए पत्र के जरिए इसी विषय पर संपर्क किया गया था। इस विरोधाभास के बीच अमेरिकी प्रशासन की ईरान नीति और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ईरान को लेकर अमेरिका की रणनीति ऐसे समय चर्चा में है, जब ट्रंप प्रशासन सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। खबर में दावा किया गया है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों और हजारों सैनिकों की तैनाती भी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रेखांकित करती है।
ऐसे माहौल में वेंस की कथित कूटनीतिक पहल को अहम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह यह संभावना तलाश रहे हैं कि क्या बातचीत के जरिए सैन्य संघर्ष को रोका जा सकता है या कम से कम टाला जा सकता है। हालांकि, वेंस की ओर से भेजे गए पत्र का वास्तविक उद्देश्य और उसके बाद हुई बातचीत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। पिछले सप्ताह मोहसिन रेजाई ने कथित तौर पर कहा था कि जब तक ट्रंप प्रशासन ईरान की मांगें पूरी नहीं करता, तब तक तेहरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा। ऐसे में वेंस का पत्र दोनों देशों के बीच किसी संभावित कूटनीतिक पहल का संकेत हो सकता है, लेकिन इसे औपचारिक शांति वार्ता की शुरुआत मानना अभी जल्दबाजी होगी।
रिपोर्ट में दावा किया है कि वेंस सार्वजनिक रूप से सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन निजी बातचीत में उन्होंने संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने को लेकर चिंता भी जताई है। फरवरी में ट्रंप के कथित ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू करने से पहले वेंस ने व्यापक कूटनीतिक प्रयासों की वकालत की थी। बाद में ट्रंप ने उन्हें प्रमुख वार्ताकार की जिम्मेदारी सौंपी।
इसके बाद वेंस ने संघर्ष समाप्त कराने के उद्देश्य से ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए दो अंतरराष्ट्रीय यात्राएं भी कीं। रिपोर्ट के अनुसार, जून में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता ज्ञापन तैयार हुआ था, लेकिन हस्ताक्षर के करीब दो सप्ताह बाद ही यह व्यवस्था टूट गई। इसकी प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात बहाल करने की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बताए गए।
इसके बाद कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई बातचीत से भी गतिरोध दूर नहीं हो सका। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंध हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रियायतें दे, जबकि तेहरान तत्काल आर्थिक राहत की मांग कर रहा है। दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं में अंतर के कारण बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है।
मोहसिन रेजाई के संभावित रूप से प्रमुख भूमिका में आने से वार्ता की दिशा भी प्रभावित हो सकती है। इससे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ जैसे नेताओं की भूमिका में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रेजाई को औपचारिक रूप से मुख्य वार्ताकार नियुक्त किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
रेजाई 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध में शामिल रहे हैं और लंबे समय तक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का नेतृत्व कर चुके हैं। अमेरिकी हमलों की आशंका के बीच ईरान की सुरक्षा नीति में उनका प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी महीने उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के साथ क्षेत्रीय डेटा सेंटरों और इंटरनेट केबलों को निशाना बनाए जाने की चेतावनी भी दी थी।
ट्रंप एक ओर ईरान के साथ समझौते की संभावनाओं का जिक्र करते रहे हैं, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी देते रहे हैं। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। पिछले सप्ताह उन्होंने कहा था कि अमेरिका तेहरान के साथ बातचीत नहीं कर रहा है और सैन्य कार्रवाई के संकेत भी दिए थे।
मंगलवार को एक चुनावी कार्यक्रम में ट्रंप ने ईरान पर जानबूझकर समझौते की प्रक्रिया लंबी खींचने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी चुनाव समाप्त होने तक इंतजार करने से ईरान को कोई लाभ नहीं होगा। अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। युद्ध और ईंधन की बढ़ती कीमतें मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में ईरान के साथ संघर्ष का असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने का फैसला वही करेंगे। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वेंस का पत्र वास्तव में चिकित्सा सहायता तक सीमित था या इसके जरिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क की संभावनाएं भी तलाशने की कोशिश की गई। अमेरिकी प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी आने तक इस मामले में स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।
