इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक नाबालिग सिख लड़की के इस्लाम अपनाने का मामला सामने आया है। एक वायरल वीडियो में लड़की कहती सुनाई दे रही है कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया है और उसे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। हालांकि, वीडियो कब और कहां बनाया गया, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले के सामने आने के बाद सिख समुदाय के कुछ लोगों ने धर्मांतरण को लेकर चिंता जताई है। वीडियो में लड़की कहती है कि वह लंबे समय से इस्लाम के बारे में जानना और उसे समझना चाहती थी।
उसका कहना है कि नमाज पढ़ने और रोजे रखने के बिना उसे अपनी जिंदगी अधूरी लगती थी। लड़की के अनुसार, उसकी मुलाकात साकिब नाम के व्यक्ति से हुई, जिसने उसे इस्लाम के बारे में बताया। इसके बाद उसे लगा कि उसे इसी रास्ते पर सुकून मिलेगा। फिर वह कहती है कि जब साकिब ने उसे कलमा पढ़ने में मदद की, तो उसे लगा कि जैसे आज उसे कुछ असाधारण हासिल हुआ है और उसे अपना रब मिल गया है। वीडियो में लड़की रमजान के अपने पहले अनुभव का जिक्र करते हुए कहती है कि वह बहुत खुश है और उसे इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन करके शांति महसूस होती है। लड़की का दावा है कि उसे धर्म परिवर्तन करने का कोई पछतावा नहीं है। इस घटना के बाद सिख समुदाय से जुड़े कुछ लोगों और सामाजिक माध्यमों पर सक्रिय लोगों ने कथित ‘कौर से खान’ अभियान को लेकर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि सिख लड़कियों को निशाना बनाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
सिख समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाने वाली सिमरनप्रीत कौर ने पाकिस्तान में सिख लड़कियों के दबाव में इस्लाम अपनाने से जुड़ी खबरों पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि सिख लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तानी अधिकारी क्या कदम उठा रहे हैं। नवदीप सिंह सहित समुदाय के अन्य लोगों ने भी ऐसे मामलों को गंभीर चिंता का विषय बताया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में कुछ नाबालिग सिख लड़कियों के धर्म परिवर्तन के मामलों को लेकर दबाव डालने या बहला-फुसलाकर धर्म बदलवाने के आरोप सामने आए हैं। कुछ समूहों पर धर्म परिवर्तन के बदले 10,000 पाउंड तक की रकम देने का आरोप भी लगाया गया है। फिलहाल, यह मामला सिख समुदाय में चिंता और बहस का विषय बना हुआ है।