चंडीगढ़: भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रधान अमन अरोड़ा ने आज कहा कि भारत का चुनावी लोकतांत्रिक ढांचा पिछले कई दशकों के अपने ‘सबसे गंभीर संस्थागत संकट’ का सामना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की स्वायत्तता को सुनियोजित तरीके से समाप्त किया गया है और देश को ‘निर्वाचित तानाशाही’ की ओर धकेला जा रहा है।
पंजाब विधानसभा में पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग करने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए श्री अमन अरोड़ा ने पंजाब के उन स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की आजादी और मतदान के अधिकार के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। मतदान के अधिकार में समानता के संबंध में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नागरिकता का मूल आधार है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून पर निशाना साधते हुए अरोड़ा ने कहा कि चयन कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। पहले इस कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, लेकिन अब मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया गया है, जिससे विपक्ष के नेता कमेटी में अल्पमत में रह गए हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या एक पार्टी की नहीं है। यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ‘आत्मा’ को बचाने की लड़ाई है। यदि इस व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो भविष्य की प्रत्येक सरकार को एक कमजोर और अवसरवादी व्यवस्था के अनुसार काम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। डेढ़ अरब की आबादी वाले देश का अस्तित्व लोगों के उस विश्वास पर टिका हुआ है, जिसका सीधा संबंध लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से है।’’