मंदिरों में लगी भक्तों की लाइनें
जालंधरः मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ रविवार को शारदीय नवरात्र का आगाज हो गया। ऐसे में रविवार को शुरु हुए पहले नवरात्र पर शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की बड़ी लाइनें देखी गईं। इस दौरान लोगों ने माथा टेक मां का आशीर्वाद लिया। श्री देवी तालाब मंदिर पंजाब का एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ है, जहां माता सती का बायां स्तन गिरा था। मां त्रिपुरमालिनी के दर्शनों के लिए श्रद्धालु न केवल जालंधर बल्कि दूर-दराज के इलाकों से पहुंच रहे है। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों और लाइटों से भव्य रूप में सजाया गया है। भक्त लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, ताकि प्रथम नवरात्र पर मां शैलपुत्री का आशीर्वाद लेकर अपने 9 दिनों के व्रत का संकल्प ले सकें।
शारदीय नवरात्रि पर श्री देवी तलाब मंदिर के पुजारी ने लोगों को नवरात्रि के त्योहार की बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यहां गर्भगृह के सामने मां की अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है। नवरात्र के विभिन्न दिनों में सामूहिक ज्योति प्रज्वलन और माता रानी के विभिन्न स्वरूपों की विशेष पूजा की जाती है।
वहीं सिद्ध शक्तिपीठ मां त्रिपुरमालिनी मंदिर की कथा के बारे में बताया। मान्यता है कि मां त्रिपुरमालिनी के दरबार में जो भी भक्त सवा महीने तक लगातार आता है, उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। यहां हर शुक्रवार को मां की भव्य चौकी लगाई जाती है। मंदिर के पुजारी ने कहा कि पंजाब में एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ स्थान जालंधर के श्री देवी तालाब मंदिर में ही है। वहीं यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। लोककथा के अनुसार 200 साल पुराना यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है और इसमें एक तालाब है, जो पवित्र माना जाता है। देवी तालाब मंदिर में माता रानी के दर्शनों के बाद सबसे पहले श्री वैष्णो देवी और बाबा अमरनाथ गुफा है। ये गुफाएं जनकराज बग्गा ने बनाई थी। इसके अलावा मंदिर में भगवान शिव की एक मूर्ति भी है। हर साल दिसंबर में यहां हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन आयोजित किया जाता है, जो पास और दूर के संगीतकारों और यात्रियों की एक बड़ी संख्या को आकर्षित करता है। इसके अलावा मंदिर के निकट में काली देवी को समर्पित एक मंदिर है।
