जालंधर, ENS: गांव लाधेवाली में रिहायशी कॉलोनी “धालीवाल एन्क्लेव फ़ेज़-2” में वर्तमान में MTP की कार्रगुजारी को लेकर सवाल खड़े हुए है। जहां परदीप सिंह द्वारा कालोनी को लेकर उच्च अधिकारियों को शिकायत दी गई है। दरअसल, परदीप सिंह के माध्यम से दी ऑनलाइन शिकायत (नंबर PB/LOUT/JUC/JALAN/1478), गांव लधेवाली में H.B. नंबर 220, खसरा नंबर 9/2, 12/2, 13/1, 12/3/2, 13/2, 18 और 18/1/2 प्रस्तावित प्रोजेक्ट कॉलोनी “धालीवाल एन्क्लेव फेज-2” के लिए CLU की मंज़ूरी से संबंधित है। इस शिकायत में मांग की गई है कि मंज़ूरी पर आगे कोई भी कार्रवाई करने से पहले पूरे रिकॉर्ड और ज़मीन पर मौजूद स्थिति की स्वतंत्र रूप से जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या लागू कानूनी, रेवेन्यू, प्लानिंग और सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया गया था।
वहीं शिकायत में कहा गया है कि मौजूदा रेवेन्यू रिकॉर्ड और साइट पर की गई नाप-जोख के अनुसार, मौजूदा रास्ता लगभग 2 करम (11 फ़ीट) चौड़ा है। जानकारी के अनुसार, संबंधित एमटीपी ने रिपोर्ट दी है कि मौजूदा सड़क को 4 करम तक चौड़ा करने के लिए लगभग 2 करम के बराबर ज़मीन का एक अतिरिक्त हिस्सा नगर निगम को ट्रांसफर किया गया है। बताया गया है कि यह ट्रांज़ैक्शन सेल डीड नंबर 2025/26/186/1/14856 (तारीख 28.01.2026) के तहत हुआ है। वहीं इस मामले को लेकर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड की जमीन में बिछी हुई पाइपलाइन और कॉलोनियों के विकास को लेकर उपजे सवाल पर नगर निगम कमिश्नर सुरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि जब भी ऐसा कोई मामला ध्यान में आता है, तो संबंधित ऑयल पीएसयू की गाइडलाइंस और हिदायतों को पूरी तरह प्राथमिकता दी जाती है।
एग्जीक्यूशन के समय जो भी नियम लागू होते हैं, उन्हें पूरी तरह फॉलो किया जाता है। इंडियन ऑयल द्वारा छोड़ी जाने वाली जमीन और नगर निगम की गाइडलाइंस के बीच तालमेल पर बोलते हुए कमिश्नर ने कहा कि इसका कोई एक फिक्स पैमाना नहीं है, बल्कि यह कॉलोनी के साइज पर निर्भर करता है। कॉलोनी के आकार के हिसाब से ही कवर्ड एरिया, अनकवर्ड एरिया या ओपन स्पेस छोड़ी जाती है, जो केस-टू-केस वेरी करती है।
जब कमिश्नर से यह पूछा गया कि जिस कॉलोनी के संबंध में यह पत्र लिखा गया है, वहां क्या स्थिति है, तो उन्होंने कहा कि यह मामला अभी उनके ध्यान में नहीं है, यदि ऐसा है तो इसकी जांच करवा ली जाएगी। काम पूरी तरह से नियमों के दायरे में होगा और किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया जाएगा। नियमों और शर्तों की अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि हाउसिंग डिपार्टमेंट और नगर निगम सहित विभिन्न विभागों के अपने-अपने एक्ट और बिल्डिंग नॉर्म्स होते हैं, जिनके मुताबिक ही काम किया जाता है।