टेक्नोलॉजी: एआई का दौर इस समय बढ़ता दिख रहा है। वहीं कुछ सेक्टर्स ऐसे भी हैं जहां इसको लेकर बहस चल रही है। कुछ लोग इसको सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी बता रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इसके चलते जॉब्स और इंसानों पर पड़ने वाले असर के कारण परेशान हैं। अब इसी के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी एआई को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। ओबामा ने कहा कि एआई कंपनियों के मार्केट वैल्यू बढ़ेगी पर इसका मतलब यह नहीं है कि एआई की टेक्नोलॉजी भी ओवरहाइप्ड है।
एआई पर ओबामा की कमीशन ने बनाई थी रिपोर्ट
ओबामा ने बताया कि उनके राष्ट्रपति रहते हुए 2015-16 के आस-पास ही उनकी एडमिनिस्ट्रेशन ने एआई का सोशल, इकोनॉमिक और एथिकल इम्पैक्ट समझने के लिए एक कमीशन भी बनाई थी। इस कमीशन ने एआई को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। ओबामा के अनुसार, इसके बाद आई एडमिनिस्ट्रेशन ने इस रिपोर्ट को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया है। ऐसे में एआई को लेकर जिन सवालों पर भी उस समय चर्चा शुरु हुई थी अब वो सवाल और भी ज्यादा बड़े हो गए हैं।
एआई इंसानों से ट्रेनिंग ले रहा
एआई के तेजी के साथ आगे बढ़ने का सबसे बड़ा कारण रिसर्सिव लर्निंग भी है। एआई सिर्फ अब इंसानों से ट्रेनिंग लेकर ही आगे नहीं बढ़ रहा बल्कि खुद भी सीख रहा है। ओबामा के अनुसार, कुछ समय पहले तक एआई मॉडल्स की लर्निंग में करीबन 90 फीसदी हिस्सा इंसानों के इनपुट का होता था। वहीं अब कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल चुकी है। यह बैलेंस अब करीबन 50-50 तक पहुंच चुका है। वहीं एआई को आगे बढ़ाने में ह्यूमन ट्रेनिंग के साथ उसका खुद भी सीखना भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।
सेल्फ लर्निंग हो सकता है एआई
वहीं ओबामा का यह कहना है कि आने वाले समय में अब एआई की लर्निंग में करीबन 90 प्रतिशत हिस्सा सेल्फ लर्निंग होगा। यदि ऐसा होगा तो एआई डेवलपमेंट की स्पीड आज के मुकाबले काफी ज्यादा तेज हो जाएगी। ओबामा ने इस ग्रोथ को हॉकी स्टिक जैसी ग्रोथ बताया है। उनका कहना है कि शुरुआत में ग्रोथ धीरे-धीरे होती है पर एक पॉइंट के बाद स्पीड अचानक से बढ़ जाती है।