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84 साल की उम्र में जेल पहुंचा बुजुर्ग, जानें ऐसा कौनसा किया था गुनाह, सहारे की जगह मिली जेल की सजा

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बिहारः जिस उम्र में लोगों को अपने परिवार और बच्चों के सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में बिहार के एक 84 वर्षीय बुजुर्ग को जेल जाना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर देखकर लोग यह कह रहे हैं कि इंसान को अपने कर्मों का फल कभी न कभी जरूर मिलता है।

चलने-फिरने तक में हो रही परेशानी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुजुर्ग की शारीरिक हालत काफी कमजोर हो चुकी है। वह न तो ठीक से चल पा रहे हैं और न ही अपने बल पर बैठ सकते हैं। उन्हें उठाने और बैठाने के लिए दो लोगों के सहारे की जरूरत पड़ती है। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी हालत बेहद नाजुक है, लेकिन वर्षों पहले किए गए एक गंभीर अपराध का मामला अब उनके सामने आ खड़ा हुआ है।

1992 में हुई थी हिंसक घटना
यह मामला बिहार के वैशाली जिले के राघवपुर गांव का है। घटना 10 नवंबर 1992 की सुबह की बताई जा रही है। उस समय अदालत राय नामक व्यक्ति अपनी पत्नी रामशकी देवी के साथ घर के बाहर बैठे हुए थे।

आरोप है कि उसी दौरान गांव के दीप राय अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ वहां पहुंचे। उनके पास हथियार भी थे। बताया जाता है कि वे रास्ते में कांच के टुकड़े बिछा रहे थे। जब अदालत राय और उनकी पत्नी ने इसका विरोध किया, तो दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया।

विरोध करने पर किया गया हमला
आरोप के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद दीप राय और उनके परिवार के लोगों ने अदालत राय और उनकी पत्नी पर हमला कर दिया। इस हमले में दोनों को गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मामले की जांच शुरू हुई।

पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने 13 मार्च 1993 को आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू हुई। कई वर्षों तक चले इस केस में 17 जून 1999 को अदालत ने आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए।

10 गवाहों के बयान हुए दर्ज
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 10 गवाहों की गवाही कराई गई। गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने पूरे मामले की जांच की। लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान इस केस से जुड़े चार आरोपियों की मौत भी हो गई।

33 साल बाद आया फैसला
करीब 33 साल तक चले इस मामले में आखिरकार अदालत ने फैसला सुनाया। फैसले के बाद 84 वर्षीय बुजुर्ग को सजा का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि कानून की नजर में अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, न्याय की प्रक्रिया अपना काम करती रहती है।

 

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