जालंधरः आम आदमी पार्टी के विधायक रमन अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए जालंधर ईडी दफ्तर में पेश हुए। जिसके बाद कई घंटों की चली पूछताछ के बाद ईडी दफ्तर से बाहर आ गये। लेकिन इस दौरान मीडिया द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब दिये बिना ही वहां से रवाना हो गये। ईडी की ओर से उन्हें समन जारी किया गया था। सफेद कुर्ता-पायजामा पहने रमन अरोड़ा के दफ्तर पहुंचने की वीडियो भी सामने आई है।
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साढ़े आठ घंटे तक चली पूछताछ
जालंधर ईडी दफ्तर में दस्तावेज लेकर पहुंचे विधायक रमन अरोड़ा से ईडी की ओर से साढ़े आठ घंटे पूछताछ की गई है। ईडी से पूछताछ के बाद 7.30 बजे विधायक रमन अरोड़ा बाहर निकले। उनसे पूछा गया कि ईडी ने पूछताछ की है तो उन्हें कैमरे आगे बोलने से परहेज किया और वह बेटे राजन अरोड़ा के साथ गाड़ी में बैठकर चले गए।
आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा है मामला
मिली जानकारी के अनुसार यह जांच आय से अधिक संपत्ति के एक मामले से जुड़ी है, जिसमें उन्हें पहले पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने गिरफ्तार भी किया था।
बता दें कि रमन अरोड़ा पंजाब विधानसभा में जालंधर सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। अरोड़ा के खिलाफ अपनी चार्जशीट में, पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन पर जालंधर में दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों से वसूली में शामिल होने का आरोप लगे थे। पंजाब विजिलेंस की ओर से विधायक के खिलाफ दर्ज FIR को आधार बनाकर ED ने मनी लांड्रिंग को लेकर जांच शुरू की है।
गौर हो कि विजिलेंस ब्यूरो का मामला उनकी कथित तौर पर 1.10 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति रखने पर केंद्रित है। गिरफ्तारी के बाद, अरोड़ा को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। नोटिसों के ज़रिए बिल्डिंग मालिकों को सीलिंग और तोड़फोड़ की धमकी दी गई, और मामलों को वापस लेने या सुलझाने के बदले में अवैध रिश्वत की मांग सामने आई थी।
अधिकारियों ने बताया कि उन्हें 2 जून को जालंधर स्थित ईडी कार्यालय में केंद्रीय एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है, जिसके बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनका बयान दर्ज किया जाना था। अधिकारियों के अनुसार, विधायक को इससे पहले पंजाब सतर्कता ब्यूरो द्वारा कथित तौर पर 1.10 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने भी पिछले साल 23 अगस्त को अरोड़ा के खिलाफ रंगदारी मांगने का एक मामला दर्ज किया था। बाद में 22 सितंबर को जालंधर की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।
