चंडीगढ़/लुधियाना: पंजाब सरकार ने जेलों में कैदियों के लिए स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए शुक्रवार को लुधियाना में ‘नशा, एचआईवी और जेलों में कैदियों का स्वास्थ्य’ विषय पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी), पंजाब जेल विभाग और टीवाईसीआईए के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य सरकार, जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है तथा नशा पीड़ितों को अपराधी नहीं बल्कि मरीज मानकर उनका उपचार किया जा रहा है।

डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि पिछले एक वर्ष तीन महीनों में 10,000 से अधिक नशा पीड़ितों को जेल भेजने के बजाय नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है। साथ ही 25,000 कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी और नशे से संबंधित जांच की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जेलों में ओओएटी क्लीनिक, आईटीआई कौशल विकास पाठ्यक्रम, मनोचिकित्सक और काउंसलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि जेलें केवल सुधार गृह नहीं, बल्कि उपचार और पुनर्वास के केंद्र बन सकें। वहीं, जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि के साथ-साथ पंजाब को सुधारात्मक न्याय का भी राष्ट्रीय मॉडल बनना चाहिए।

बैठक में जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं, नशा एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम, महिलाओं के स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, ओपिओइड उपचार, पुनर्वास और रिहाई के बाद उपचार की निरंतरता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। यूएनओडीसी के विशेषज्ञों ने जेल स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करते हुए कहा कि कैदियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और मनोसामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना उनका मूल अधिकार है। बैठक के अंत में सभी संबंधित विभागों ने मानवाधिकार आधारित, समावेशी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाकर जेलों में स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं को और प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की।
