एक रात के लिए रुकने को लोग खर्च करते हैं हजारों रुपये
नई दिल्लीः कहते हैं अगर मन में कुछ ठान लें, तो कुदरत भी उस काम को करने के लिए आपका साथ देने लगती है। ऐसे ही कुछ नई दिल्ली के 2 भाइयों के साथ हुआ है। जहां नई दिल्ली के आर्किटेक्ट भाई अंश और राघव कुमार कॉर्पोरेट जॉब को छोड़ अपना कुछ करने की चाह के चलते, आज बिजनेसमैन बन गए। उनके एक छोटे से आईडिया ने उन्हें बढ़िया कमाई देने के लिए एक जरिया दे दिया है।

जानकारी मुताबिक, आर्किटेक्ट भाई अंश और राघव कुमार कॉर्पोरेट जगत के शोर-शराबे और भागदौड़ भरी जिंदगी से बचने के लिए भारत के एक दूरदराज कस्बे में बस गए और उन्होंने वहां मिट्टी का एक सुंदर विला तैयार किया। उनके इस विला में ठहरने के लिए अब लोग हजारों रुपयों को खर्च करने के लिए तैयार हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कोविड में उन्होंने तय किया कि वह दोनों एक बड़ा कदम उठाएंगे। तभी दोनों भाइयों ने नई दिल्ली में घर पर क्वारंटाइन में रहते हुए घर बनाने के लिए अपनी चीजों से एक्सपेरिमेंट किया, जिसमें उन्होंने घर में उगाए गए मशरूम से माइसेलियम का टेस्ट किया और मिट्टी, भूसे और पानी से बनी प्राकृतिक चीजों से कोब बनाने के बारे में सीखा। यही वह समय था जब शहर के शोरगुल से दूर पहाड़ों में घर बनाने का विचार उनके मन में पनपा जिसके बाद उन्होंने पहाड़ी की ढलान पर मिट्टी, पत्थर और भूसे से एक अनोखा घर बना दिया। इस विला को कोई हैरी पॉटर का घर कहता है तो कोई हॉबिट का घर और कोई परियों की कहानी का घर कहकर बुलाता है, लेकिन दोनों भाइयों के लिए ये प्यार से बनाया गया घर है। वह मानते हैं कि इस घर की हर एक आकृति उन सभी प्यारे लोगों की कहानी बयां करती है जो यहां आए और इसे बनाने में मेहनत की।
अपने इस सुंदर विला को बनाने के लिए दोनों ने हिमालय की तलहटी में बसे ऋषिकेश को चुना। इस जगह को भारत की योग राजधानी के रूप में जाना जाता है और यह नई दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर है। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर ऐतिहासिक रूप से तीर्थयात्रा का केंद्र रहा है, लेकिन अब ये जगह कैफे, कॉर्पोरेट और वेलनेस रिट्रीट का एक फेमस पॉइंट बन गई है। शायद इसी वजह से विला बनाने के लिए इस जगह को चुना गया।
इस घर को बनाने में दोनों भाइयों ने 28 से 30 लाख रुपये खर्च किए हैं। अब ये विला 2 बेडरूम और वन बाथरूम कि लिस्ट में शामिल है, जिसमें ठहरने के लिए प्रति रात के हिसाब से लगभग 13 से 14 हजार रुपये लगते हैं। वैसे तो ये विला हर किसी के मन को भाएगा। लेकिन इस तक पहुंचने के लिए छोटी सी ट्रैकिंग करनी होगी। इंटरनेट से दूर, प्रकृति की गोद में बसे इस विला में लोग शांति का अनुभव करते हैं।
