नई दिल्ली: भारत के दोस्तों में तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने पूर्वी भूमध्य सागर में बढ़ते तनाव को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में खासकर साइप्रस द्वीप के आस-पास संघर्ष की आगे भड़काने की कोशिश की जा रही है। यदि तुर्किए तथा तुर्किए साइप्रस के लोगों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई तो इसका जवाब बेहद सख्त होगा।
एर्दोगन ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट करते हुए कहा कि – ‘तुर्किए इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है। किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि तुर्किए तथा तुर्किए साइप्रस के लोगों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई तो उसका जवाब बेहद सख्त होगा।
इजरायल-ग्रीस साइप्रस गठजोड़ पर नाराजगी
एर्दोगन के तीखे बयान के पीछे इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के बीच बन रहा है। नया सैन्य और ऊर्जा गठबंधन माना जा रहा है। तुर्किए का आरोप है कि यह गठबंधन क्षेत्र में उसके प्रभाव को सीमित करने और उसे घेरने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी के सांसदों को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा कि कुछ छोटे समूह इजरायल के हितों को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये देश सिर्फ हवाई किले बना रहे हैं और उन्हें जोखिम भरे कदम उठाने से बचना चाहिए। तुर्किए के राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी से इजरायल का हौसला बढ़ा है। उसकी नीतियां क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है। उन्होंने कहा कि इजरायल को अंतरराष्ट्रीय कानून को दायरे में लाना अब सिर्फ देशों को नहीं बल्कि पूरी मानवता का मुद्दा है।
सैन्य ठिकानों का कर रही है इस्तेमाल
इजरायल ने ग्रीस और साइप्रस के साथ मिलकर पूर्वी भूमध्य सागर में लगभग 2500 सैनिकों वाली संयुक्त रैपिड-रेस्पॉन्स सैन्य टास्क फोर्स बनाने का समझौता किया है। इसके अंतर्गत इजरायली वायुसेना और नौसेना ग्रीस तथा साइप्रस के कुछ सैन्य ठिकानों को उपयोग कर रही है। तुर्किए इसे अपनी समुद्री सीमाओं और उत्तरी साइप्रस की घेराबंदी के रुप में देख रहा है। साथ ही लेबनान और सीरिया में इजरायली सैन्य कार्रवाईयों को लेकर भी तुर्किए की चिंता बढ़ी हैं। एर्दोगन ने कहा कि यदि यह स्थिति आगे बढ़ी तो इसका असर सीधे तुर्किए की सुरक्षा पर पड़ सकता है तो इसका सीधा असर सीधे तुर्किए की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
