नई दिल्ली: बीते कई दिनों से कई मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी खबरें काफी वायरल हो रही हैं जिसमें दावा किया जा रहा है। केंद्र सरकार मंदिर ट्रस्ट के सोने के बदले उनको गोल्ड बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सरकार ने मंदिरों के सोने के भंडार के मुद्रीकरण के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सरकार ने इन सभी दावों का पूरी तरह से खंडन करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। सरकार ने साफ किया है कि देश के किसी भी मंदिर ट्रस्ट या धार्मिक संस्थान के पास मौजूद सोने के मुद्रीकरण के लिए ऐसी कोई योजना नहीं लाई जा रही है। इस तरह की सभी अटकलें और अफवाहें पूरी तरह से झूठ, भ्रामक और आधारहीन हैं।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर यह भी अफवाह उड़ाई जा रही है कि मंदिर के शिखरों, दरवाजों या अन्य स्ट्रक्चर पर लगी सोने की परतों को भारत का रणनीतिक स्वर्ण भंडार माना जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत है।
सरकार ने लोगों से की ये अपील
सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वो इस तरह की किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें। इसे आगे शेयर या सर्कुलेट करें। बिना पुष्टि वाली ऐसी खबरों और भ्रामक जानकारियों को फैलाने से समाज में बिना वजह के भ्रम की स्थिति पैदा होती है और लोग गुमराह हो सकते हैं।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वो सिर्फ अधिकृत चैनलों के जरिए से जारी सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। नीतिगत फैसलों या सरकारी योजनाओं से जुड़ी कोई भी वास्तविक जानकारी सिर्फ आधिकारिक प्रेस रिलीज, सरकारी वेबसाइटों और वेरिफाइड पब्लिक कम्यूनिकेशन फोरम के जरिए से शेयर कर जाती है।
