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आंखों के रास्ते मन में पहुंचता है पाप: गणेश दत्त शास्त्री 

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वदोली में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्म पर झूमे श्रद्धालु

ऊना/ सुशील पंडित : जिला ऊना के गांव वदोली में चल रही चौथे दिन की श्रीमद् भागवत कथा में भगवान की अपार लीलाओं और प्रभु श्री राम व श्री कृष्ण का जन्म दिवस के बारे बताया गया। इस अवसर पर समस्त वदोली वासियों के तत्वाधान में गांव के ठाकुरद्वारा मंदिर के प्रांगण में हो रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के चौथे दिन प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव के साथ कथा का शुभारम्भ हुआ। भगवान श्री राम के जन्म और उनके जीवन चरित्र का बखान करते हुए कथा व्यास गणेश दत्त शास्त्री जी ने कहा कि भगवान राम का जीवन चरित्र हमें सिखाता है कि मित्रों के साथ मित्र जैसा, माता-पिता के साथ पुत्र जैसा, सीता जी के साथ पति जैसा, भाइयों के साथ भाई जैसा, सेवकों के साथ स्वामी जैसा, गुरू के साथ शिष्य जैसा व्यवहार कैसे किया जाता है। जो भगवान राम के जीवन चरित्र को अपने जीवन में चरितार्थ करेगा उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। राम राज्य में मनुष्य के अतिरिक्त जीव-जंतु में परपस्पर प्रेम और सद्भाव से रहते थे। इस दौरान प्रभु राम का जन्म, वन गमन, लंका दहन,राम-जानकी विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया।

इस दौरान श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। कथा में जैसे ही श्री कृष्ण प्रसंग आया पूरा पंडाल हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाल स्वरूप श्री कृष्ण के दर्शन किए और व्यास पीठ पर विराजित कथा व्यास गणेश दत्त शास्त्री जी ने कान्हा को व्यास पीठ पर दुलारा। कथा व्यास ने श्री कृष्ण प्रसंग सुनाते हुए कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कंस के अत्याचारों के कारण ही उसने अभिमान और अनीति पूर्वक राज करने के लिए अपने पिता उग्रसेन को बंदी बना लिया था। आकाशवाणी से अपनी भावी मृत्यु का संकेत पाकर उसने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया। वहां एक-एक करके उनके छह पुत्रों की हत्या कर दी। सातवें गर्भ में खुद शेषनाग के आने पर योग माया ने उनको माता देवकी के गर्भ से निकालकर वासुदेव की पहली पत्नी माता रोहणी के गर्व में स्थापित कर दिया। भगवान ने आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया। 

कथा व्यास गणेश दत्त शास्त्री ने रसास्वादन करवाते हुए कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था। अष्टमी तिथि को रात्रिकाल अवतार लेने का प्रमुख कारण उनका चंद्रवंशी होना है। श्रीकृष्ण चंद्रवंशी, चंद्रदेव उनके पूर्वज और बुध चंद्रमा के पुत्र हैं। इसी कारण चंद्रवंश में पुत्रवत जन्म लेने के लिए कृष्ण ने बुधवार का दिन चुना है। अष्टमी तिथि शक्ति का प्रतीक है, श्रीकृष्ण शक्ति संपन्न, स्वमंभू व परब्रह्म हैं इसलिए वो अष्टमी को अवतरित हुए। 

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